sattu

सत्तु अक्सर सात प्रकार के धान्य मिलाकर बनाया जाता है .ये है मक्का , जौ , चना , अरहर ,मटर , खेसरी और कुलथा .इन्हें भुन कर पीस लिया जाता है

आयुर्वेद के अनुसार सत्तू का सेवन गले के रोग, उल्टी, आंखों के रोग, भूख, प्यास और कई अन्य रोगों में फायदेमंद होता है। इसमें प्रचुर मात्रा में फाइबर, कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम आदि पाया जाता है। यह शरीर को ठंडक पहुंचाता है।

जौ का सत्तू

यह जलन को शांत करता है। इसे पानी में घोलकर पीने से शरीर में पानी की कमी दूर होती है। साथ ही बहुत ज्यादा प्यास नहीं लगती। यह थकान मिटाने और भूख बढाने का भी काम करता है। यह डायबिटीज के रोगियों के लिए काफी फायदेमंद होता है। यह वजन को नियंत्रित करने में भी मददगार होता है।

चने का सत्तू 

चने के सत्तू में चौथाई भाग जौ का सत्तू जरूर मिलाना चाहिए। चने के सत्तू का सेवन चीनी और घी के साथ करना फायदेमंद होता है। इसे खाने से लू नहीं लगती।

अपनी डाइट में शामिल करें सत्तू, रहेंगे हमेशा फिट

मोटापे का दुश्मन

सत्तू एक कंप्लीट डाइट है। इसमें प्रोटीन के साथ ही मिनरल्स, आयरन, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस बहुत होता है। साथ ही ये फाइबर से भरा है। इसे खाने से पेट आसान से भर जाता है और देर तक भरा रहता है। इसे खाने से प्यास भी खूब लगती है तो पानी पीने से पेट और देर तक भरा फील होता है। ऐसे में ये वेट लॉस के लिए बेहतर फूड होता है।

बॉवेल मूवमेंट के लिए

खाली पेट सत्तू पीने से आपका डाइजेस्टिव ट्रैक्ट स्वस्थ रहता है। सत्तू में आयरन और फाइबर उच्च मात्रा में होता है जो आपके पेट से जुड़ी समस्याओं को बेहतर करता है और आपके बॉवेल से टॉक्सिंस को फ्लश करने में मदद करता है।

लू से बचाता है

सत्तू की तासीर ठंडा होता है। इसलिए गर्मी में इसे खाने से शरीर ठंडा भी रहता है और पानी अधिक पीने से ये डिहाइड्रेशन से भी बचाता है। इससे लू नहीं लगती है। सत्तू शरीर का तापमान नियंत्रित रखने में कारगर होता है।

शरीर के टॉक्सिंस को नष्ट करता है

सत्तू में डिटॉक्सीफाइंग एजेंट होता है जो आपके शरीर में होने वाले विषाक्त पदार्थ को नष्ट करता है और शरीर को स्वस्थ रखता है और कई स्वास्थ्य समस्याओं से भी बचाता है।

एनीमिया में फायदेमंद

सत्तू कैल्शियम, आयरन से भी भरा होता है। ऐसे में जिन्हें एनिमिया है वह इसे जरूर खाएं। आप चाहें तो रोज पानी में तीन चम्मच सत्तू मिलाकर पीएं। ये आपके लिए फायदेमंद होगा।

भूख बढ़ाता है

खाली पेट सत्तू पीने से आपकी भूख बढ़ती है क्योंकि इसमें पोटेशियम और मैग्निशियम उच्च मात्रा में मौजूद होते हैं। ऐसे में आप नाश्ते में अपने शरीर को पोषण प्रदान करते हैं।

ऊर्जा बढ़ाता है

खाली पेट सत्तूर पीना आपके लाल रक्त कोशिकाओं को तेज़ी से बढ़ने के लिए उत्तेजित करता है। आपके रक्त में अधिक लाल रक्त कोशिकाएं होने पर आपके शरीर को अधिक ऑक्सीजन मिलती है, जो आपको ऊर्जा प्रदान करती है।

डायबिटीज में रामबाण है

सत्तू में मौजूद बीटा-ग्लूकेन शरीर में बढ़ते ग्लूकोस के अवशोषण को कम करता है। इससे ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है। सत्तू लो ग्लाइमेक्स इंडेक्स वाला होता है। इतना ही नहीं ये लंबे समय तक पेट को भरा रखता है इसलिए ये डायबिटीज के लिए फायदेमंद होता है।

गर्मियों में घर पर कैसे बनाएं सत्तू का शरबत

सत्तू आपकी सेहत के लिए कितनी फायदेमंद है ये तो आप जानती ही हैं लेकिन क्या आप ये जानती हैं कि सत्तू का शरबत कैसे बनता है। आप अपने घर पर आसानी से इस बार गर्मियों में सत्तू का हेल्दी शरबत बनाने की रेसिपी जान लीजिए।

सत्तू का मीठा शरबत बनाने की आसान विधि

3 बड़ा चम्मच सत्तू (भुने चने का आटा)
4 बड़ा चम्मच गुड़ या स्वादानुसार चीनी
आधा चम्मच काला नमक (चाहें तो)
4 कप पानी
बर्फ के कुछ टुकड़े

सत्तू का मीठा शरबत बनाने की विधि

सबसे पहले एक बर्तन में सत्तू और पानी डालकर अच्छे से चलाते हुए मिलाएं ताकि सत्तू में गुठली न बनें.

फिर सत्तू में कद्दूकस किया हुआ गुड़ या चीनी मिलाएं.

जब गुड़ या चीनी पूरी तरह से सत्तू में घुल जाए तो इसमें काला नमक डालकर मिक्स करें.

तैयार है सत्तू का शरबत. इसमें बर्फ के टुकड़े डालें और गिलास में डालकर सर्व करें.

सत्तू का नमकीन शरबत बनाने की सामग्री

चने का सत्तू – आधा कप
पोदीना के पत्ते – 10
नीबू का रस- 2 चम्मच
हरी मिर्च – आधी
भुना जीरा – आधा छोटी चम्मच
काला नमक – स्वादानुसार या आधा छोटी चम्मच
नमक – एक चौथाई चम्मच या स्वादानुसार

सत्तू का नमकीन शरबत बनाने की विधि

पोदीना के पत्ते धोइये, 2 पत्ते साबुत छोड़ कर, सारे पत्ते बारीक काट लीजिये. हरी मिर्च को बारीक काट लीजिये हरी मिर्च को कम तीखा खाते हैं तब अपने हिसाब से कम कर लीजिये।

सबसे पहले सत्तू में थोड़ा सा ठंडा पानी डालकर गुठलियां खतम होने तक घोल लीजिये, और अब 1 कप पानी मिला दीजिये, घोल में काला नमक, सादा नमक, हरी मिर्च, पोदीना की पत्तियां, नीबू का रस और भुना जीरा पाउडर डाल कर मिला दीजिये. सत्तू का नमकीन शर्बत तैयार है।

सत्तू के नमकीन शर्बत को गिलास में डालिये और पोदीना की साबुत पत्ती डालकर सजा दीजिये, शर्बत को और अधिक ठंडा करने के लिये, 3-4 बर्फ के क्यूब बारीक तोड़कर डाल कर मिलाये जा सकते हैं।

गर्मी के मौसम में रोजाना 1 -2 गिलास सत्तू का नमकीन शर्बत बनाकर पीजिये, ये आपको गर्मी से राहत देगा और लू से भी बचायेगा।

सत्तू खाने खाने से पहले इन बातों का रखें ख्याल

■  चने के सत्तू ज्यादा न खाएं बल्कि इसमें जौ मिला लें। चने का सत्तू गैस बनाता है।

■  जिन्हें स्टोन है वह सत्तू खाने से बचें क्योंकि इसमें कैल्शियम काफी होता है।

■  सत्तू को हमेशा ताज़े पानी में घोलना चाहिए गर्म पानी में नहीं।

■  गाढे सत्तू का सेवन कभी नहीं करना चाहिए क्योंकि गाढा सत्तू पचने में भारी होता है और पतला सत्तू आसानी से पच जाता है ।

■  अगर आप चने के सत्तू को पानी, काला नमक और नींबू के साथ घोलकर पीते हैं तो फिर यह आपके पाचनतंत्र के लिए काफी फायदेमंद होता है।

■  सत्तु का सेवन करने से ज़्यादा तैलीय खाना खाने से होने वाली तकलीफ ख़त्म हो जाती है।

■  सत्तू को खाते समय बीच में पानी नहीं पीएं। खाने के बाद पानी पीएं।

■  दिन में एक या दो बार से अधिक सत्तू बिलकुल न खाएं।

■  सत्तू खाना आपके सेहत के लिए गर्मियों में वरदान होता है लेकिन इसे सर्दियों व बरसात में कम से कम खाना चाहिए।

इस वेबसाइट में जो भी जानकारिया दी जा रही हैं, वो हमारे घरों में सदियों से अपनाये जाने वाले घरेलू नुस्खे हैं जो हमारी दादी नानी या बड़े बुज़ुर्ग अक्सर ही इस्तेमाल किया करते थे, आज कल हम भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में इन सब को भूल गए हैं और छोटी मोटी बीमारी के लिए बिना डॉक्टर की सलाह से तुरंत गोली खा कर अपने शरीर को खराब कर देते हैं। तो ये वेबसाइट बस उसी भूले बिसरे ज्ञान को आगे बढ़ाने के लक्षय से बनाई गयी है। आप कोई भी उपचार करने से पहले अपने डॉक्टर से या वैद से परामर्श ज़रूर कर ले। यहाँ पर हम दवाएं नहीं बता रहे, हम सिर्फ घरेलु नुस्खे बता रहे हैं। कई बार एक ही घरेलु नुस्खा दो व्यक्तियों के लिए अलग अलग परिणाम देता हैं। इसलिए अपनी प्रकृति को जानते हुए उसके बाद ही कोई प्रयोग करे। इसके लिए आप अपने वैद से या डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करे।
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