सूर्य नमस्कार योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है। यह अकेला अभ्यास ही साधक को सम्पूर्ण योग व्यायाम का लाभ पहुंचाने में समर्थ है। इसके अभ्यास से साधक का शरीर निरोग और स्वस्थ होकर तेजस्वी हो जाता है। ‘सूर्य नमस्कार’ स्त्री, पुरुष, बाल, युवा तथा वृद्धों के लिए भी उपयोगी बताया गया है।

“आदित्यस्य नमस्कारन् ये कुर्वन्ति दिने दिने ।
आयुः प्रज्ञा बलम् वीर्यम् तेजस्तेशान् च जायते ॥”

(जो लोग प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करते हैं, उनकी आयु, प्रज्ञा, बल, वीर्य और तेज बढ़ता है।

सूर्य नमस्कार 12 योगासनों को मिलाकर बनाया गया है. हर एक आसान का अपना महत्व है| इसे करने वालों का कार्डियोवस्कुलर स्वास्थ्य अच्छा रहता है|साथ ही शरीर में खून का संचार भी दुरुस्त होता है. सूर्य नमस्कार के जरिए आप अपना तनाव कम कर सकते हैं और इससे शरीर को डिटॉक्स करने में मदद मिलती है|सूर्य नमस्कार प्राचीन समय से योग गुरुओं के बीच काफी चर्चित रहा है|यह विदेश में भी इतना ही लोकप्रिय है| सूर्य नमस्कार से तन, मन और वाणी, तीनों को शांति और ऊर्जा मिलती है| वहीं, सूर्य नमस्कार शरीर के सभी अंगों को क्रियाशील बनाता है|

सूर्य नमस्कार की 12 विधियां हैं-

प्राणामासन

एक सर्वश्रेष्ठ जगह को खोजने के बाद फर्श पर चटाई बिछा लें और उस पर सीधे खड़े हो जाएं। इस अवस्था में आपके दोनों पैर एक-दूसरे से जुड़े होने चाहिए। अब आप अपने दोनों हाथों को जोड़कर सीधे खड़े हो जाएं तथा अपनी आंखें आराम से बंद कर लें। अब अपने मस्तिष्क को शांत करते हुए खुद को केंद्रित कर लें तथा पहले मंत्र ‘ॐ मित्राय नमः’ से सूर्य भगवान का आह्वान करें।

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हस्त उत्तानासन

इसमें आपको सीधे खड़े होकर अपने श्वास खींचते हुए दोनों हाथों को कानों से ऊपर की ओर लेकर जाना है। इस स्थिति में अपने दोनों हाथों को ऊपर की ओर तानें तथा भुजाओं और गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं

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उत्तानासन

इसमें आपको धीरे-धीरे अपने श्वास को बाहर निकालते हुए आगे की ओर झुकना है। अपने हाथ ठीक उसी तरह रखें जैसे पिछले आसन में थे, बस केवल हाथों को इसी अवस्था गर्दन के साथ, कानों से सटे हुए रखकर धीरे से नीचे जाकर पैरों के दाएं-बाएं ले जाएं। यहां आपको दोनों हाथों से पृथ्वी का स्पर्श करना है।

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अश्व संचालनासन

इसमें श्वास को भरते हुए बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं और छाती को खींचकर आगे की ओर तानें। ऐसा करते हुए अपनी गर्दन को अधिक पीछे की ओर झुकाएं। आपकी दाहिनी टांग जो इस समय पीछे की ओर है उसे भी खींचकर रखें।

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चतुरंग दंडासन

इसमें आपको अपने श्वास को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए दाएं पैर को पीछे ले जाना है। अब आपके दोनों पांव एक-दूसरे से जुड़े हुए होने चाहिए। दोनों पैरों की एड़ियां परस्पर मिलने के बाद आप पीछे की ओर शरीर को खिंचाव दें और एड़ियों को पृथ्वी पर मिलाने का प्रयास करें। नितम्बों को अधिक से अधिक ऊपर उठाएं और गर्दन को नीचे की ओर झुकाएं।

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अष्टांग नमस्कार

इसमें आपको श्वास भरते हुए जमीन पर सपाट ले जाना है। इस अवस्था में आपका शरीर पूरी तरह से पृथ्वी का स्पर्श कर रहा हो। इसके बाद नितम्बों को थोड़ा ऊपर उठा दें और श्वास छोड़ दें।

6

भुजंगासन

इसमें आपको धीरे-धीरे श्वास को भरते हुए छाती को आगे की ओर खींचते हुए हाथों को सीधा करना है। इसके बाद गर्दन को पीछे की ओर ले जाएं और घुटने पृथ्वी का स्पर्श करते हुए तथा पैरों के पंजे खड़े रहें। इस स्थिति में आपके दोनों हाथ बिल्कुल सीधे होने चाहिए।

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अधोमुक्त श्वानासन

इसमें आपको श्वास को धीरे-धीरे बाहर निष्कासित करते हुए दाएं पैर को भी पीछे ले जाना है। इसके बाद दोनों पैरों की एड़ियों को एक-दूसरे से मिला दें। पीछे की ओर शरीर को खिंचाव दें और एड़ियों को पृथ्वी पर मिलाने का प्रयास करें। इसके बाद नितम्बों को काफी ऊपर उठाएं और गर्दन को नीचे झुका दें।

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अश्व संचालनासन

सूर्य नमस्कार के नौवें आसन को अश्व संचालनासन कहा जाता है, जिसमें आपको श्वास को भरते हुए अपने बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाना है। इसके बाद अपनी छाती को खींचकर आगे की ओर तानें और गर्दन को अधिक पीछे की ओर झुकाएं।

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उत्तानासन

इसके बाद आपको उत्तानासन करना है जो सूर्य नमस्कार का दसवां आसन है। इस आसन में आप श्वास को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए शरीर को आगे की ओर झुकाएं। हाथ गर्दन के साथ, कानों से सटे हुए नीचे जाकर पैरों के दाएं-बाएं पृथ्वी का स्पर्श करें। ध्यान रहे अपने घुटने सीधे रखें।

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हस्त उत्तानासन

ग्यारवें आसन हस्त उत्तानासन के लिए आप हाथों को वापस ऊपर ले आएं और सीधे ऊपर तनें। इस आसन में दोनों पांव आपस में जोड़े रखें और ऊपर आते हुए श्वास भरें।

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प्राणामासन

इसके बाद श्वास को धीरे से छोड़ते हुए दोनों हाथ सामने की ओर जोड़ें ठीक वैसे ही जैसे सबसे पहले आसन में किया था। यह सूर्य नमस्कार का आखिरी तथा 12वां आसन है।

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