आयुर्वेद में कोरोना नामक किसी बीमारी का उल्लेख नहीं है। लेकिन संक्रमण और लक्षणों की समानता के आधार पर इस चिकित्सा पद्धति में इसकी तुलना वात-श्लैष्मिक ज्वर से की जा सकती है। आयुर्वेद में किसी भी रोग के उपचार से ज्यादा रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर उसके बचाव पर जोर दिया गया है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, जयपुर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सीआर यादव बता रहे हैं वायरस से बचाव के तरीके…

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के आसान उपाय

■  तुलसी के 20 पत्ते अच्छी तरह से साफ करके उन्हें एक गिलास पानी में उबालकर छान लें। अब इस पानी में एक चम्मच पीसा हुआ अदरक और एक चौथाई दालचीनी चूर्ण डालकर पानी आधा रहने तक उबालें। गुनगुना करके उसमें थोड़ा-सा शहद मिलाकर चाय की तरह दिन में दो-तीन बार लें। जब भी लेना हो, इसे ताजा ही बनाएं।

■  तुलसी के 20 पत्ते, अदरक का एक छोटा टुकड़ा और 5 कालीमिर्च को चाय में डालकर उबालें और उस चाय का सेवन करें। इसका सेवन सुबह और शाम के समय किया जा सकता है। दो चाय के बीच 10 से 12 घंटे का गैप दें।

■  रोजाना नहाने के बाद नाक में सरसों या तिल के तेल की एक-एक बूंद डालें। अगर आप किसी सार्वजनिक स्थान पर जा रहे हैं तो घर से निकलने के पहले भी ऐसा ही करें।

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■  कपूर, इलायची और जावित्री का मिश्रण बना लें और इसे रुमाल में रखकर समय-समय पर सूंघते रहें।

■  लौंग और बहेड़े को देसी घी में भूनकर रख लें। इन्हें समय-समय पर मुंह में रखकर चूसते रहें।

क्या करें, क्या न करें?

■  हमेशा गुनगुने पानी और ताजे भोजन का ही सेवन करें।

■  भोजन में मूंग, मसूर, मोठ आदि हल्की दालों का प्रयोग करें।

■  मौसमी और ताजा फल व सब्जियों का उपयोग करें।

■  भोजन में अदरक, कालीमिर्च, तुलसी, इलायची, शहद आदि का नियमित उपयोग करें।

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■  ठंड से बचाव करें, मौसम के अनुसार आवश्यक कपड़े पहनें ।

■  आइसक्रीम, कोल्डड्रिंक्स, ठंडे पानी व ठंडे जूस का सेवन न करें।

■  अधिक चिकनाई या तले हुए भोजन का उपयोग भी कम से कम करें। कच्चे व अधपके मांसाहार से बचना चाहिए।

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