किडनी स्टोन (Kidney stones) यानि गुर्दे की पथरी एक दर्दनाक और धीरे-धीरे होने वाली समस्या है। बहुत से लोग ऐसा मानते हैं कि यह एक जेनेटिक बीमारी है, केवल बुजुर्ग ही इससे प्रभावित होते हैं और खाने में बदलाव कर पथरी होने से रोका जा सकता है। किडनी से जुड़े रोगों के लक्षण हर कोई नहीं समझ पाता है जिस वजह से इसके खराब होने का अंतिम चरण में पता चलता है। मुंबई के कई अस्पतालों में यूरो-आंकलोजिकल और रोबोटिक सर्जन डॉक्टर अनूप रमानी आपको किडनी स्टोन से जुड़ी कुछ सामान्य बातें बता रहे हैं, जो आपको मालूम होनी चाहिए।

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ज्यादा पानी पीने से किडनी की पथरी नहीं होगी, ऐसा जरूरी नहीं

यह सच है कि कम मात्रा में पानी पीने की वजह से भी किडनी की पथरी हो सकती है। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है कि ज्यादा पानी पीने के बावजूद किडनी की पथरी नहीं हो सकती है। सवाल यह है कि किडनी की पथरी से बचने के लिए कितना पानी पीना चाहिए? आमतौर पर आपको रोजाना कम से कम आठ गिलास पानी पीना चाहिए। ज्यादा पानी पीने से आप केवल टॉयलेट का रुख ज्यादा कर सकते हैं।

किडनी की पथरी किसी को भी हो सकती है

लोग ऐसा मानते हैं कि किडनी की पथरी केवल बुढ़ापे में ही होती है। लेकिन सच्चाई यह है कि शिशु, बच्चे, जवान और बुजुर्ग किसी को भी यह समस्या हो सकती है।

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किडनी स्टोन के सभी मामलों में सर्जरी की जरूरत नहीं

अधिकांश लोगों को यह लगता है किडनी की पथरी का एकमात्र इलाज सर्जरी है। हालांकि इसे दवाओं से भी सही किया जा सकता है। अगर पथरी 7 एमएम से छोटी है, तो इसे दवाओं के जरिए पेशाब द्वारा निकाला जा सकता है। अगर पथरी का साइज़ 7 से 8 एमएम है तो,ऐसे मामले में सर्जरी की जरूरत होती है। इसके अलावा पथरी के साइज़ और उसकी जगह पर भी सर्जरी निर्भर करती है।

महिलाओं की तुलना में पुरुषों को ज्यादा होती है ये समस्या

हालांकि ये समस्या दोनों को हो सकती है लेकिन आंकड़ों के अनुसार पुरुषों को महिलाओं की तुलना में किडनी की पथरी का ज्यादा खतरा होता है। हालांकि ऐसा नहीं कहा जा सकता कि महिलाएं इसकी चपेट में बिल्कुल भी नहीं आती हैं। इसके कई लक्षण हैं जैसे- पेशाब के समय जलन, यूटीआई, लोअर बैक और पेट में दर्द आदि। ये सभी लक्षण महिलाओं और पुरुषों में समान हो सकते हैं।

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एसिडिक डायट से किडनी की पथरी का अधिक खतरा होता है

विशेष रूप से वातित यानि गैस से भरे पेय में एसिडिक के मात्रा अधिक होती है। ध्यान रहे कि यूरिन नेचर में एल्कलाइन होता है और अगर आप अधिक वातित पेय पीते हैं तो इसमें मौजूद एसिडिक तत्व यूरिन की संरचना बदल सकता है और आपको किडनी स्टोन होने के खतरा बढ़ सकता है। जब आप एक कोला की एक कैन पीते हैं, तो ये आपके सिस्टम के भीतर 36 घंटे तक होती है जो यूरिन को एल्कलाइन से एसिडिक में बदलती रहती है।

कभी-कभी किडनी की पथरी के लक्षणों का पता नहीं लगता

ऐसे लोग जिन्हें छोटी पथरी है, उन्हें प्रारंभिक चरणों में इसके कोई भी लक्षण महसूस नहीं होते हैं। पेशाब या शरीर के किसी भी कार्य में बाधा आए बिना भी किडनी में पथरी हो सकती है। इसका पता एक्स-रे या सीटी स्कैन से चलता है।

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दवा और खानेपीने की चीजों में बदलाव कर किडनी में पथरी बनने से रोका जा सकता है

कई बार कम मांस, कैल्शियम, प्रोसेस्ड फूड्स और हिडन साल्ट्स से मदद मिल सकती है। कई बार लोग किडनी की पथरी के डर से कैल्शियम लेना बंद कर देते हैं। आपको बता दें कि कैल्शियम बहुत जरूरी है। इसकी कमी से किडनी की पथरी के चांस होते हैं। इसलिए इस समस्या से बचने के लिए आपको डायट का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अगर बात करें दवाओं की तो किसी भी तरह की एंटीबायोटिक लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। आपको बता दें कि एंटीबायोटिक दवाओं से किडनी की पथरी होने का खतरा होता है।

किडनी की पथरी एक से अधिक बार भी हो सकती है

कई ऐसे मामले देखे गए हैं जिनमे लोगों को एक से अधिक बार किडनी की पथरी हुई है। आमतौर पर अगर किसी को एक बार पथरी हो जाती है, तो दूसरी बार जांच का दायरा बढ़ जाता है। इस दौरान किडनी फंक्शन, थायराइड, विटामिन डी का लेवल आदि की जांच की जाती है। कई बार रिपोर्ट नॉर्मल होती है और किसी को रिकरंट किडनी का पता नहीं चल पाता है। इसका मतलब यह है कि जिसे दो बार यह समस्या हुई है उसे लाइफ में बार-बार इस रोग से गुजरना पड़ सकता है। ऐसे लोगों को दिन में तीन लीटर पानी पीना, कम नमक खाना आदि बातों का ध्यान रखना चाहिए। अगर रिकरंट किडनी के पीछे थायरॉयड ट्यूमर या इन्फेक्शन है तो उसका उचित इलाज कराना चाहिए।

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