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हालांकि सामाजिक तौर पर धूम्रपान करने पर काफी हद तक पाबंदी लगाई गई है लेकिन आज भी कई सारे लोग इस लत का शिकार है। एक ओर जहां कार्यस्थलों, शॉपिंग कॉंप्लेक्स, थिएटर और जनरल स्टोर्स पर धूम्रपान करना कानूनन जुर्म घोषित कर दिया गया है, पर इसके बाद भी सिगरेट और बीड़ी की वजह से मरने वालों की तादाद आज भी अन्य बीमारियों या सड़क दुर्घटनाओं से मरने वालों से कहीं ज्यादा है। इसमें मौजूद तंबाकू और अन्य हानिकारक रसायन न केवल धूम्रपान करने वालों के लिए बल्कि उनके आसपास के लोगों के लिए भी उतना ही हानिकारक सिद्ध होता है। आइए जानते हैं इसके क्या क्या दुष्प्रभाव हैं-

आंखों पर दुष्परिणाम

धूम्रपान की वजह से आपकी दृष्टि भी प्रभावित होती है, जो लोग सिगरेट-बीड़ी पीने की लत रखते हैं, उनमें धब्बेदार अध पतन जैसी आंखों से संबंधित परेशानियाँ आम हैं। यह न केवल आपको बल्कि आपके आसपास के लोगों के लिए भी इस प्रकार की बीमारियां होने का खतरा बढ़ा देता है। मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, मधुमेह, केरेटिनोपैथी, ड्राई आई सिंड्रोम जैसी आंखों से संबंधित विकारों से बचने के लिए धूम्रपान का त्याग करें।

फेफड़ो के केन्सर का मुख्य कारण

फेफड़ों के कैंसर का मुख्य कारण सिगरेट और बीड़ी माना जाता है। इसका धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में फेफड़ों का कैंसर होने की आशंका बहुत ज्यादा होती है। जो लोग पेस्सिव तौर पर धूम्रपान का सामना करते हैं, उनको भी इस का खतरा उतना ही होता है। पुरुषों के मुकाबले महिलाएं इस बीमारी का शिकार आम तौर पर हो जाती हैं, लेकिन जो लोग धूम्रपान की आदत को किसी भी उम्र में छोड़ने में सफल हो पाते हैं, उन्हें फेफड़ों के कैंसर से दूरी बनाए रखना आसान होता है, इसलिए जहां तक हो सके धूम्रपान कि गलत आदत ना डालें और जो लोग आपके आसपास धूम्रपान करते हैं उनसे भी दूरी बनाकर रखें।

शुगर की बीमारी होने की आशंका

जिन लोगों को धूम्रपान नियमित करने की आदत होती है, उन्हें शुगर की बीमारी होने की आशंका भी ज्यादा होती है। धूम्रपान चयापचय को नुकसान पहुंचाता है, जिससे टाइप 2 मधुमेह की संभावना बनी रहती है। इसके साथ ही इसी कारण से आपकी बॉडी मास इंडेक्स स्वतंत्र तंत्र की वजह से भी, आपको शुगर की बीमारी होने का खतरा रहता है। धूम्रपान की वजह से महिलाओं में भी इसका सामान असर होता है और उनको भी टाइप 2 मधुमेह का सामना का सामना करना पड़ सकता है।

साँस संबंधी रोगों का कारण

जो लोग सिगरेट या बीड़ी का नियमित रूप से सेवन करते हैं, उन्हें श्वसन प्रणाली से संबंधित समस्याएं जैसे अस्थमा और टीबी होने की संभावनाएं ज्यादा होती हैं। ना केवल वह व्यक्ति जो धूम्रपान कर रहा है बल्कि उसके आसपास मौजूद लोगों के लिए भी साँस संबंधी रोगों का खतरा बढ़ जाता है। यह परेशानियां माता-पिता से बच्चों में भी ट्रांसफर होने का खतरा बना रहता है।

प्र*जनन क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव

धूम्रपान नियमित रूप से करने से पुरुष और महिलाओं दोनों में प्र*जनन संबंधी परेशानियां बढ़ जाती हैं। यह पुरुष के शु*क्राणुओं और कोशिकाओं को कम करता है और महिलाओं में ए*स्ट्रोजन की उत्पत्ति कम होने लगती है। इसका सीधा असर आपके शरीर की प्र*जनन क्षमता पर पड़ता है। इसके परिणाम स्वरुप बां*झपन जैसी परिस्थितियां आप को घेर लेती हैं।

घाव जल्दी नहीं भरते

धूम्रपान की वजह से लोगों में कई सारी बीमारियां सीधे तौर पर भी हो जाती है और उसके साथ-साथ पेस्सिव रूप से भी कई तरह की परेशानियां उन्हें घेर लेती हैं, जैसे कि जो लोग सिगरेट और बीड़ी के धुएें को सोखने की आदत रखते हैं, उन्हें जब भी चोट लगती है तो उनके घाव देर से भरते हैं। यहां तक की अगर उनकी हड्डी टूट जाए, तो उसे जोड़ने में बहुत मुश्किल होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इससे आपकी लाल रक्त कोशिकाएं, हड्डी की कोशिकाएं और सफेद रक्त कोशिकाएं भी धूम्रपान से नकारात्मक रूप से प्रभावित होती हैं। इसका सीधा असर आपके रिकवरी के समय पर पड़ता है जिससे आपके घाव धीरे भरते हैं एवं आपके शरीर में रक्त के थक्के जमने में ज़्यादा समय लगता है। इससे आपके उतकों की विकृति में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

संधीशोध में बढ़ोत्तरी

जो लोग धूम्रपान की लत से ग्रसित हैं, उनमें रूमेटाइड गठिया की परेशानी होने की संभावना ज्यादा होती है। आमतौर पर देखा जाए तो जो लोग धूम्रपान नहीं करते, उनके मुकाबले ऐसे व्यक्ति में गठिया के रोग की संभावना दुगनी पाई जाती है। हड्डियों की कमजोरी से होने वाले ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डियों के फ्रैक्चर का कारण भी धूम्रपान ही माना जाता है। अगर आप मजबूत हड्डियां और एक बेहतर स्वास्थ्य चाहते हैं तो धूम्रपान की लत को त्याग दें।

दिल की बीमारियों को निमंत्रण

निकोटीन एक अत्यंत ही जहरीला पदार्थ माना जाता है जो धीरे-धीरे असर करता है। यह आपको कैंसर और दिल से जुड़ी कई परेशानियों की तरफ धकेलता है। जब आप सिगरेट का धुआं सोखते हैं, तो निकोटीन आपके फेफड़ों में प्रवेश करता है। यह आपकी कैरोटिड धमनी से आपके दिमाग तक होने वाले रक्त प्रवाह में बाधा उत्पन्न करता है, जिसकी वजह से आपको स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

एजिंग की प्रक्रिया में बढ़ोत्तरी

उम्र के साथ हमारी त्वचा पर झुर्रिया, फाइन, लाइन्स जैसे समस्याएं होने लगती हैं, इसके साथ ही त्वचा पर सूजन और डार्क स्पॉट्स दिखने लगते हैं। धूम्रपान की वजह से इस प्रक्रिया में तेजी आ जाती है, जिसका परिणाम यह होता है कि आपके चेहरे के साथ-साथ आपके पूरे शरीर की त्वचा जल्दी ही इन परेशानियों से प्रभावित होने लगती है।

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