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स्वस्थ रहने के चार नियम

नियम 1 : खाना खाने के बाद तुरंत पानी नहीं पीना हे.. (Don’t have water after taking meal.)

खाना खाने के बाद पीया हुआ पानी विष (ज़हर) के समान है… खाना खाने के 1 घंटे बाद या फिर खाना खाने के 40-45 मिनिट पहले पानी पी शक्ते हो। वजह: पानी जठराग्नि (fire in stomoch) को बुझा देता है। तो खाना खाने के बाद पानी पिने से खाना सड़ जाता है। फिर खाना हजम नहीं होता। तो फिर गैस, जलन, अपचन आदि होता है। खाने के तुरंत बाद दहीं की लस्सी या फलका रस (निम्बू रस) या दूध पि शक्ति हो। सवेरे सवेरे(नास्ता) खाने के बाद फलका रस , दोपहर खाना खाने के बाद लस्सी और शाम के खाने के बाद दूध पीओ।

नियम 2 : घूँट घूँट भरके पानी पीओ। (Have water Sip by sip)

पानी जबभी पिए एक एक घूँट पिए.. एक साथ पूरा नहीं। घूँट घूँट करके पानी पीनेकी वजहसे मुँह की लार (स्लाइवा saliva) पेटमे अंदर जाती है। इससे वात पितकी असन्तुलनता नहीं होती। कुत्ता शेर पक्षी आदि चाट चाट के पानी पिते है। इस वजह से वह ओवर वेइट नहीं है। घूँट घूँट भरके पानी पीओ।

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नियम 3 : फ्रिज या कूलर का पानी या बहोत ठंडा पानी न पीजिए। (Don’t Drink cold water or chilled water)

ठन्डे पानी से ह्दय ठंडा होता है और ह्दय ठंडा होता है तो मस्तिष्क ठंडा होता है। जब मस्तिष्क ठंडा होता है तो इंसान ठंडा होता है। जब इंसान ठंडा होता है तब वह मर जाता है। गर्मीके दिनोमे अगर ठंडा पानी पीना ही है तो मटकेका (घड़ेका ) पानी पीवे।

नियम 4 : सुबह उठने के तुरंत बाद (आँख खुलते ही ) पानी पीजिये

1 या 1.5 लोटा पानी पीजिये उसके बाद टॉयलेट जाइये। इससे  पेट साफ़ हो जाएगा। Have a 3-4 glasses of water just after waking up early in the morning.

यह चार नियम से वात, पित और कफ संतुलित होता है।

इस वेबसाइट में जो भी जानकारिया दी जा रही हैं, वो हमारे घरों में सदियों से अपनाये जाने वाले घरेलू नुस्खे हैं जो हमारी दादी नानी या बड़े बुज़ुर्ग अक्सर ही इस्तेमाल किया करते थे, आज कल हम भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में इन सब को भूल गए हैं और छोटी मोटी बीमारी के लिए बिना डॉक्टर की सलाह से तुरंत गोली खा कर अपने शरीर को खराब कर देते हैं। तो ये वेबसाइट बस उसी भूले बिसरे ज्ञान को आगे बढ़ाने के लक्षय से बनाई गयी है। आप कोई भी उपचार करने से पहले अपने डॉक्टर से या वैद से परामर्श ज़रूर कर ले। यहाँ पर हम दवाएं नहीं बता रहे, हम सिर्फ घरेलु नुस्खे बता रहे हैं। कई बार एक ही घरेलु नुस्खा दो व्यक्तियों के लिए अलग अलग परिणाम देता हैं। इसलिए अपनी प्रकृति को जानते हुए उसके बाद ही कोई प्रयोग करे। इसके लिए आप अपने वैद से या डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करे।
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