हिंदू धर्म में मांगलिक कार्य करने से पहले शुभ मुहूर्त सूर्य की चाल पर भी जरूर ध्यान दिया जाता है. साल में कुछ तिथि और दिन ऐसे होते हैं जिनमें शुभ काम करना वर्जित माना गया है. इन्हीं में से एक है खरमास. शास्त्रों के अनुसार खरमास में विवाह, जनेऊ संस्कार, नामकरण संस्कार, मुंडन, गृह प्रेवश, भूमि पूजन जैसे शुभ काम करने की मनाही है. साल 2022 के आखिरी माह में खरमास लगने जा रहा है, ऐसे में जरूरी मांगलिक कार्य इससे पहले ही निपटा लें. आइए जानते हैं दिसंबर में खरमास कब से शुरू होगा और कब है इसका समापन.

खरमास में क्यों बंद किए जाते हैं मांगलिक कार्य

जब सूर्य देव बृहस्पति राशि में प्रवेश करते हैं तो उनका बल कमजोर हो जाता है. इस कारण से इस समय कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है. साल में दो बार खरमास लगता है. एक बार जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं और दूसरा जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करते हैं. 16 दिसंबर से 14 जनवरी तक सूर्य धनु राशि में विराजमान रहेंगे.

खरमास का समय

खरमास की तिथि 16 दिसंबर से शुरू होकर 14 जनवरी तक चलेगा. 14 जनवरी को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे तो उस दिन से मांगलिक कार्य फिर से किए जा सकेंगे.

खरमास में न करें ये काम

  • खरमास के दौरान, मांगलिक कार्यों की मनाही होती है. इसलिए इन दिनों में कोई भी शुभ कार्य न करें।
  • खरमास में बेटी या बहू की विदाई नहीं करनी चाहिए।
  • खरमास के दौरान गाजर, विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे संस्कारों के अलावा खरमास में नया वाहन, घर, प्लाट, रत्न-आभूषण और वस्त्र आदि नहीं खरीदना चाहिए।
  • इस दौरान गाजर, मूली, तेल, चावल, तिल, बथुआ, मूंग, सोंठ और आंवला का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • शास्त्रों के अनुसार, खरमास की अवधि के दौरान तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए। इस समय लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।

खरमास के दौरान इन नियमों का रखें ध्यान

  • खरमास में सूर्य उपासना का बहुत महत्व होता है, इस दौरान प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए।
  • खरमास के दौरान चारपाई या पलंग का त्याग कर भूमि पर बिस्तर लगाकर शयन करना चाहिए।
  • खरमास की अवधि में थाली की बजाए पत्तल में भोजन करना उत्तम रहता है।
  • ये माह आराधना और जप, उपवास आदि के लिए शुभ माना जाता है।
  • अपने में पूरी तरह से शुद्धता बनाए रखें, मन में किसी के प्रति बुरी भावना लाने से बचें।
  • खरमास के दौरान भगवान विष्णु की पूजा करना भी बेहद शुभ रहता है।
  • इसके अलावा खरमास में नियमित रूप से तुलसी पूजन भी करना चाहिए।
इस वेबसाइट में जो भी जानकारिया दी जा रही हैं, वो हमारे घरों में सदियों से अपनाये जाने वाले घरेलू नुस्खे हैं जो हमारी दादी नानी या बड़े बुज़ुर्ग अक्सर ही इस्तेमाल किया करते थे, आज कल हम भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में इन सब को भूल गए हैं और छोटी मोटी बीमारी के लिए बिना डॉक्टर की सलाह से तुरंत गोली खा कर अपने शरीर को खराब कर देते हैं। तो ये वेबसाइट बस उसी भूले बिसरे ज्ञान को आगे बढ़ाने के लक्षय से बनाई गयी है। आप कोई भी उपचार करने से पहले अपने डॉक्टर से या वैद से परामर्श ज़रूर कर ले। यहाँ पर हम दवाएं नहीं बता रहे, हम सिर्फ घरेलु नुस्खे बता रहे हैं। कई बार एक ही घरेलु नुस्खा दो व्यक्तियों के लिए अलग अलग परिणाम देता हैं। इसलिए अपनी प्रकृति को जानते हुए उसके बाद ही कोई प्रयोग करे। इसके लिए आप अपने वैद से या डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करे।
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