एसिडिटी से जुड़ी एक आम सोच जो ज्यादातर लोगों को सही लगती है वह यह है कि एसिडिटी होने पर खट्टे फल नहीं खाने चाहिए। लेकिन यह सही नहीं है। एसिडिक प्रकृति के होने के बावजूद खट्टे फल एसिडिटी से परेशान लोग खा सकते है। क्योंकि पेट में जाने के बाद साइट्रिक एसिड लार के साथ मिलकर एल्कलाइन में बदल जाता है। इसीलिए फल एसिडिटी को बढ़ाने का कारण नहीं बनते। दरअसल साइट्रस फल(खट्टे फल) को अपनी डायट में शामिल कर आपकी मदद ही होगी और एसिडिटी की संभावना कम होगी।

क्या आपको रोज एसिडिटी होती है?

इसके अलावा भी खट्टे फल सेहत के लिहाज से भी काफी फायदेमंद हैं। इनसे आपकी रोगप्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है और गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास भी होता है। संतरा, मौसमी और चकोतरा जैसे खट्टे फलों में विटामिन सी होता है जो पाचनशक्ति बढ़ाता है। यह रोगप्रतिरोधक शक्ति बढ़ाकर फ्लू और सर्दी जैसी समस्याओं से जल्द मुक्ति दिलाता है। प्रेगनेंसी के दौरान कीवी, संतरा, नींबू आदि खाने से गर्भवती महिला को एलर्जी का खतरा कम होता है। साथ ही इन फलों से फॉलिक एसिड भी प्राप्त होता है जो भ्रूण को विकसित होने में मदद करता है। विटामिन सी एक अच्छा एंटिऑक्सिडेंट भी है जो फ्री रैडिकल से बचाता है और आपकी त्वचा को भी स्वस्थ बनाता है।

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क्या आप जानते हैं कि बच्चों को सर्दी-खांसी में खट्टे फल खिला सकते हैं?

अगर आपको एसिडिटी है तो सीधे फल खाएं न कि उनका जूस पीएं। फ्रूट जूस में काफी शक्कर होती है और पोषक तत्व भी कम होते हैं । साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि फ्रूट जूस पीने का सही तरीका खाली पेट पीना है। लेकिन खट्टे फलों के जूस को खाली पेट नहीं पीना चाहिए। दो भोजन के बीच में जूस पीना भी अच्छा होता है। इसी तरह सूर्यास्त के बाद फल खाने से बचें। इन तमाम बातों का ध्यान रखकर आप अपना ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रख सकते हैं और बार-बार कुछ खाने की इच्छा भी कम होती है। यही नहीं सही समय पर फलों को खाने का मतलब है कि आपके शरीर को फल में मौजूद तमाम पोषक तत्वों का अधिकतम फायदा मिलता है।

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