त्रिफला आयुर्वेद में कई रोगों का सटीक इलाज करता है। यह 3 औषधियों से बनता है। बेहड, आंवला और हरड इन तीनों के मिश्रण से बना चूर्ण त्रिफला कहा जाता है। ये प्रकृति का इंसान के लिए रोगनाशक और आरोग्य देने वाली महत्वपूर्ण दवाई है। जिसके बारे में हर इंसान को पता होना चाहिए। ये एक तरह की एन्टिबायोटिक है। त्रिफला आपको किसी भी आयुर्वेदिक दुकान पर मिल सकता है। लेकिन आपको त्रिफला का सेवन कैसे करना है और कितनी मात्रा में करना है ये भी आपको पता होना चाहिए। हाल में हुए एक नए शोध में इस बात का खुलासा हुआ है की त्रिफला के सेवन से कैंसर के सेल नहीं बढ़ते । त्रिफला के नियमित सेवन से चर्म रोग, मूत्र रोग और सिर से संबन्धित बीमारियां जड़ से ख़त्म करती है।

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त्रिफला के फायदे

  • त्रिफला के पानी से गरारे करने से टॉन्सिल्स से राहत मिलती है।
  • नियमित त्रिफला खाने से आखों की ज्योति बढ़ती है।
  • शहद में त्रिफला का चूर्ण मिक्स करके इसका सेवन करने से त्वचा संबंधी रोग जैसे चकते पड़ना आदि ठीक हो जातें हैं।
  • कब्ज दूर करने के लिए ईसबगोल की 2 चम्मच को त्रिफला के चूर्ण के साथ मिलाकर गुनगुने पानी में डालकर सेवन करें या फिर सोने से पहले 5 ग्राम त्रिफला के चूर्ण को गुनगुने पानी या गरम दूध के साथ लेने से भी कब्ज से राहत मिलती है।

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  • जिन लोगों को अजीर्ण की दिक्कत होती हो वे 5 ग्राम त्रिफला का सेवन करें।
  • त्रिफला के चूर्ण को पानी में डालकर आखों को धोने से आखों की परेशानी दूर होती है। मोतियाबिंद, आखों की जलन, आखों का दोष और लंबे समय तक आखों की रोशनी को बढ़ाए रखने के लिए 10 ग्राम गाय के घी में 1 चम्मच त्रिफला का चूर्ण और 5 ग्राम शहद को मिलाकर सेवन करें।
  • मोटापा कम करने के लिए त्रिफला बेहद असरकारी होता है। गुनगुने पानी में त्रिफला और शहद को मिलाकर सेवन करने से पेट की चर्बी कम होती है।
  • त्रिफला चूर्ण को पानी में डालकर कुल्ला करने से मुंह के छाले दूर होते है।

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  • त्रिफला का काढा बनाकर पीने से चोट के घाव जल्दी भर जातें हैं क्योंकी त्रिफला एंटिसेप्टिक होता है।
  • सुबह शाम 5-5 ग्राम त्रिफला चूर्ण को लेने से दाद, खाज, खुजली और चर्म रोग में लाभ मिलता है।

त्रिफला बनाने का वैदिक नियम

त्रिफला बनाने के लिए हरड बहेड़ा और आंवले को इस अनुपात में लें
1:2:3
यानि कि एक हरड दो बहेड़ा और तीन आंवला।

त्रिफला लेने के आयुवेर्दिक नियम क्या हैं

  • त्रिफला प्रकृति और आयुर्वेद का ऐसा वरदान है जिसे यदि आप नियमित सेवन करते हो तो आप जीवन भर स्वस्थ और जवान बने रहोगे।
  • हमेशा कभी भी रात के समय में त्रिफला चूर्ण को गर्म दूध के साथ ही लेना चाहिए।
  • रेडिएशन के खतरे से भी त्रिफला बचाता है।
  • सुबह के समय में गुड के साथ त्रिफला का सेवन करना चाहिए।
  • डायबिटीज और पेशाब संबधी रोगों में त्रिफला को गुनगुने पानी के साथ रात के समय में सेवन करें।

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  • दोपहर के खाने के बाद दो से तीन ग्राम की मात्रा में गुनगुने पानी के साथ त्रिफला का सेवन करें।

त्रिफला के नुकसान

अनिंद्रा और बेचैनी

कई बार कुछ लोग पेट साफ करने के लिए त्रिफला का सेवन करने लगते हैं लेकिन ऐसे में वे नियमित रूप से त्रिफला का सेवन करने लगते हैं जिस वजह से उन्हें अनिंद्रा और बेचैनी की समस्या हो सकती है।

दस्त

यदि आप त्रिफला का प्रयोग बिना डाक्टर के परामर्श के करते हैं तो इससे डायरिया हो सकता है। क्योंकि यह शरीर में पानी की कमी करता है। और इंसान को डायरिया हो जाता है।

ब्लड प्रेशर

त्रिफला का अधिक सेवन से ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव होने लगता है। और ब्लड प्रेशर के मरीजों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

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इसमें कोइे दो राय नहीं है कि त्रिफला सेहत के लिए बेहद असरकारी और फायदेमंद दवा है। लेकिन इसके लिए इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है की कितनी मात्रा में त्रिफला का सेवन करना चाहिए।

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