sweet-potato shakarkand

जैसे सब्जियों का राजा आलू माना जाता है और आलू लोगों में बहुत लोकप्रिय भी है। ऐसे ही आप सभी ने एक नाम और सुना होगा जो लोगों में बहुत ही पसंदीदा है और उसका नाम है शकरकंद (स्वीट पोटैटो)। शकरकंद अपने स्वाद के कारण लोगों में बहुत ही ज्यादा पसंदीदा है।

इसे आप कच्चा और पक्का कर दोनों रूप में खा सकते हैं। कुछ लोग इसे आग में पकाते हैं और उसके बाद खाते हैं। इसकी बहुत सारी किस्म आप को दुनिया भर में आसानी से मिल जाएंगे। जो शकरकंद लाल किस्म के होते हैं उसके गूदे सूखे और ठोस होते हैं और जो शकरकंद सफेद और पीले रंग के होते हैं। उनके गूदे के अंदर बहुत ज्यादा रस होता है। जो शकरकंद (Sweet Potato) लाल किस्म के होते हैं उनकी खुशबू अलग ही होती है। जब आप उन्हें उबाल कर खाते हैं तो आपको और भी ज्यादा पोषक तत्व मिल जाते हैं। इसके अंदर बीटा कैरोटीन की मौजूदगी होती है। चलिए आज हम आपको शकरकंद के फायदे और नुकसान दोनों के बारे में विस्तारपूर्वक बताते हैं।

विटामिन ए

शकरकंद या स्वीट पोटैटो का सेवन सर्दियों में लाभदायक होता है. सर्दियों में कंद-मूल अधिक फायदेमंद रहते हैं, क्योंकि ये शरीर को गर्म रखते हैं. शकरकंद की गहरे रंग की प्रजाति में कैरोटिनॉयड जैसे, बीटा-कैरोटीन और विटामिन ए अधिक मात्रा में पाया जाता है. 100 ग्राम शकरकंद में 400 फीसदी से अधिक विटामिन ए पाया जाता है.

इम्‍यून सिस्‍टम मजबूत

शकरकंद में आयरन, फोलेट, कॉपर, मैगनीशियम, विटामिन्‍स आदि होते हैं, जिससे इम्‍यून सिस्‍टम मजबूत बनता है.

सदाबाहर जवां और खूबसूरत

इसको खाने से त्‍वचा में चमक आती है और चेहरे पर जल्‍दी झुर्रियां नहीं पड़ती. इसमें मौजूद विटामिन सी त्‍वचा में कोलाजिन का निर्माण करता है जिससे आप सदाबाहर जवां और खूबसूरत रहते हैं.

हार्ट डिजीज

शकरकंद डायट्री फाइबर और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है. शकरकन्‍द खाने में मीठा होता है. इसके सेवन से खून बढ़ता है, शरीर मोटा होता है. नारंगी रंग के शकरकंद में विटामिन ए भरपूर मात्रा में पाया जाता है. शकरकंद में कैरोटीनॉयड नामक तत्व पाया जाता है जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है. वहीं इसमें मौजूद विटामिन बी6 डायबिटिक हार्ट डिजीज में भी फायदेमंद होता है.

वजन को कम करने में मददगार

यह उच्च मात्रा वाला स्टार्च फूड है, जिसके 100 ग्राम में 90 कैलोरीज होती हैं. शकरकंद खाने में मीठा होता है. इसके सेवन से मोटापा, मधुमेह, हृदय रोगों और सम्पूर्ण तौर पर मृत्युकारक जोखिम कम होते हैं. यह आरोग्यवर्धक तथा ऊर्जा वर्धक होता है, पर वजन को कम करने में मददगार होता है.

शुगर

अगर आपको का ब्‍लड शुगर लेवल कुछ भी खाने से तुरंत ही बढ जाता है तो, शकरकंद खाना ज्‍यादा अच्‍छा होता है. इसे खाने से ब्‍लड शुगर हमेशा नियन्‍त्रित रहता है और इंसुलिन को बढने नहीं देता.

कोलेस्ट्रॉल

शकरकंद में कैलोरी और स्टार्च की सामान्य मात्रा होती है. वहीं, सैचुरेटेड फैट और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा इसमें न के बराबर रहती है. इसमें फाइबर, एंटी-ऑक्सीडेंट्स, विटामिन और लवण भरपूर पाए जाते हैं.

अमीनो एसिड

शकरकंद में भरपूर मात्रा में विटामिन बी6 पाया जाता है, जो शरीर में होमोसिस्टीन नाम के अमीनो एसिड के स्तर को कम करने में सहायक होता है. अगर इस अमीनो एसिड की मात्रा बढ़ने पर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है.

विटामिन डी

शकरकंद विटामिन डी का एक बहुत अच्छा सोर्स है. यह विटामिन दांतों, हड्ड‍ियों, त्वचा और नसों की ग्रोथ और मजबूती के लिए आवश्यक होता है. शकरकंद विटामिन ए का बहुत अच्छा माध्यम है. इसके सेवन से शरीर की 90 प्रतिशत तक विटामिन ए की पूर्ति हो जाती है.

आयरन

शकरकंद में भरपूर मात्रा में आयरन होता है. आयरन की कमी से हमारे शरीर में एनर्जी नहीं रहती, रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है और ब्लड सेल्स का निर्माण भी ठीक से नहीं होता. शकरकंद आयरन की कमी को दूर करने में मददगार रहता है.

पोटैशियम

शकरकंद पोटैशियम का एक बहुत अच्छा माध्यम है. यह नर्वस सिस्टम की सक्रियता को सही बनाए रखने के लिए आवश्यक है. साथ ही किडनी को भी स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण योगदान देता है.

इस वेबसाइट में जो भी जानकारिया दी जा रही हैं, वो हमारे घरों में सदियों से अपनाये जाने वाले घरेलू नुस्खे हैं जो हमारी दादी नानी या बड़े बुज़ुर्ग अक्सर ही इस्तेमाल किया करते थे, आज कल हम भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में इन सब को भूल गए हैं और छोटी मोटी बीमारी के लिए बिना डॉक्टर की सलाह से तुरंत गोली खा कर अपने शरीर को खराब कर देते हैं। तो ये वेबसाइट बस उसी भूले बिसरे ज्ञान को आगे बढ़ाने के लक्षय से बनाई गयी है। आप कोई भी उपचार करने से पहले अपने डॉक्टर से या वैद से परामर्श ज़रूर कर ले। यहाँ पर हम दवाएं नहीं बता रहे, हम सिर्फ घरेलु नुस्खे बता रहे हैं। कई बार एक ही घरेलु नुस्खा दो व्यक्तियों के लिए अलग अलग परिणाम देता हैं। इसलिए अपनी प्रकृति को जानते हुए उसके बाद ही कोई प्रयोग करे। इसके लिए आप अपने वैद से या डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करे।
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