digestion

आजकल हमने अपना खाना ऐसा बना लिया है जो यूरोप और अमेरिका में मज़बूरी में खाया जाता है. जैसे पावरोटी, डबल रोटी, बिस्कुट अब ये चीजें हम घर में शोंक से ला रहे हैं. आजकल ब्रेकफास्ट में ब्रेड पकोड़ा या ब्रेड का कोई न कोई प्रिपरेशन देखने को मिल जाएगा, पूछें कि ब्रेकफास्ट में ब्रेड प्रिपरेशन ही क्यूँ? तो कहते हैं कि प्रिपरेशन बहुत आसान है. आसान तो इडली भी ही सांभर भी है, डोसा भी है, और हलुवे से ज्यादा कुछ भी आसान नही है.

देसी घी का हलुवा सबसे पौष्टिक और सबसे सुरक्षित है और इतना पौष्टिक कि यदि कोई मरीज अभी घंटे पहले ऑपरेशन करवा कर भी आया हो तो उसे ही हलवा दे सकते हैं. उस पेशेंट को रोटी या दाल नही खिलाई जा सकती. कम से कम 15 दिन तक चावल भी नही खिलाया जा सकता. कोई भी पेशेंट हो ऑपरेशन के बाद अगर हलुवा खिला दें तो हीलिंग में बहुत मदद मिलेगी.

हलुवा ही ऐसा पोष्टिक भोजन है जो 5 मिनट में बन सकता है और वो ही आजकल धीरे धीरे विलुप्त हो रहा है. और उसकी जगह पावरोटी आ गयी, डबल रोटी आ गयी, घर में नुडल्स आ गये, और सुबेरे के ही नास्ते में ये सब आ गयी है और आयुर्वेद कहता है कि सुबेरे के नाश्ता ही सबसे ज्यादा मजबूत होना चाहिए. और उसी में हम पाव रोटी डबल रोटी बच्चों को खिला रहे है.

कभी कभी तो आप ही बहाना बना देते है कि सुबह बच्चे खाना खाते नही हैं. आपने आदत ही नही डाली तो क्यूँ खायेंगे वो, और यहीं से हमारी जिंदगी की गड़बड़ी शुरू हो रही है. और ये सड़े हुए मैदे की पावरोटी डबल रोटी आप जितनी खायेंगे कब्जियत उतनी ही बढ़ेगी. और कब्जियत बढ़ेगी तो शरीर की बीमारी बढ़ेगी. 103 बीमारियाँ होती है अकेले पेट ख़राब होने से ये बात हमेशा ध्यान रखिये.

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डबल रोटी, पाव रोटी और नुडल्स खाने से ये हमारे पेट के अन्दर के हिस्सों में चिपकता है और कोंस्टीपेशन बनता है. और पाव रोटी, डबल रोटी या नुडल्स को बनाने का कोई तरीका देख ले तो उसको घृणा आ जाए. इतने ख़राब तरीके से बनता है. तो आप सबसे छोटी सी विनति है कि अगर आप स्वस्थ रहना चाहते है, तंदरुस्त रहना चाहते है तो अपने जीवन में अष्टांगहृदयं के दिए हुए सूत्रों का पालन करें.

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अगर कोई मरीज ऐसा हो जिसके शरीर में 50 बीमारियाँ हो तो ये समझ नही आता कि पहले कौन सी ठीक करें. तो उसकी सबसे बड़ी बीमारी को अगर ठीक कर दिया तो बाकि अपने आप ठीक हो जाएँगी. और 99% करोनिक पेशेंट की अंतिम बीमारी निकलती है पेट की कब्जियत (कोंस्टीपेशन). और जब भी उनको कोई ऐसी दवाई दें जिससे कब्जियत ठीक हो जाए तो उनकी अन्य बीमारियाँ अपने आप ठीक हो जाती है.

राजीव जी कहते हैं कि वो बहुत से संधिवाद के पेशेंट को पेट साफ़ होने की दवाई देते थे और ये नही बताते थे कि ये संधिवाद की दवाई नही है. क्यूंकि जैसे ही पेट साफ होने लगता है तो घुटनों का दर्द अपने आप ठीक होने लगता है. जैसे ही पेट साफ़ होने लगता है पेट अपने आप साफ़ होने लगता है, नींद अच्छी आने लगती है. पेट साफ़ होते ही शरीर के जॉइंट पैन अपने आप निकलने लगता है. और अंतिम निष्कर्ष ये है कि हम जो यूरोप का खान पान अपने घर में ले आए है इसने हमको फसा दिया है.

इस वेबसाइट में जो भी जानकारिया दी जा रही हैं, वो हमारे घरों में सदियों से अपनाये जाने वाले घरेलू नुस्खे हैं जो हमारी दादी नानी या बड़े बुज़ुर्ग अक्सर ही इस्तेमाल किया करते थे, आज कल हम भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में इन सब को भूल गए हैं और छोटी मोटी बीमारी के लिए बिना डॉक्टर की सलाह से तुरंत गोली खा कर अपने शरीर को खराब कर देते हैं। तो ये वेबसाइट बस उसी भूले बिसरे ज्ञान को आगे बढ़ाने के लक्षय से बनाई गयी है। आप कोई भी उपचार करने से पहले अपने डॉक्टर से या वैद से परामर्श ज़रूर कर ले। यहाँ पर हम दवाएं नहीं बता रहे, हम सिर्फ घरेलु नुस्खे बता रहे हैं। कई बार एक ही घरेलु नुस्खा दो व्यक्तियों के लिए अलग अलग परिणाम देता हैं। इसलिए अपनी प्रकृति को जानते हुए उसके बाद ही कोई प्रयोग करे। इसके लिए आप अपने वैद से या डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करे।
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