पैकेट वाले दूध को गरम करने के नुकसान

आजकल ज्यादातर लोग पैकेट वाले दूध का इस्तेमाल करते हैं जो पहले से पॉइश्चराइज्ड होता है। यानि कि इस दूध को पहले ही अधिक तापमान पर गर्म कर फिर ठंडा किया जा चुका होता है। इस प्रक्रिया को पॉइश्चराइजेशन कहते हैं। इससे दूध को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और साथ ही इसके हानिकारक बैक्टीरिया भी मर जाते हैं।

  करंट लगने पर 5 मिनट के अंदर करें ये इलाज, बच सकती है जान

खुला हुआ दूध इस्तेमाल करने में कई सावधानियां बरतनी पड़ती हैं, जैसे दूध छानना, उसे अच्छी तरह उबालना आदि। लोकल मार्केट से खुला दूध खरीदने पर दूध को अधिक तापमान पर उबालकर ठंडा करने की आवश्यकता पड़ती है वरना वह कुछ ही घंटों में खराब हो जाता है। लेकिन आदतन यही प्रक्रिया लोग पैकेट वाले दूध यानि कि पॉइश्चराइज्ड मिल्क के साथ भी करते हैं।

पैकेट वाले दूध को गर्म करना सही है या नहीं यह सवाल कई लोगों के मन में उभरता है।

कई लोगों को यह गलतफहमी रहती है कि दूध को प्लास्टिक के पैकेट में पैक किया जाता है, इसलिए इसे सीधे तौर पर इस्तेमाल करना या पीना सेहत को नुकसान पहुंचाएगा। कई लोग दूध को इसलिए गर्म करते हैं ताकि यह ज्यादा देर तक ठीक रहे। लेकिन आपको बता दें कि अगर आप भी ऐसा करते हैं तो ऐसा करना गलत है। आपके मन में यह सवाल आना लाजिमी है कि आखिर क्यों पॉइश्चराइज्ड मिल्क को गर्म नहीं करना चाहिए?

■   खाली पेट लहसुन खाने से होते हैं ये जबरदस्त फायदे, 7 दिन तक खाएं और देखें कमाल

क्यों गर्म ना करें पॉइश्चराइज्ड मिल्क को?

फूड सेफ्टी हेल्पलाइन के संस्थापक डॉ सौरभ अरोड़ा कहते हैं कि पॉइश्चराइज्ड मिल्क को गर्म करने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती। दूध कंपनी पैकिंग से पहले ही दूध को अच्छी तरह पॉइश्चराइज करके इसे कीटाणुमुक्त और संरक्षित बना लेती है। अगर आप इसको दोबारा से गर्म करते हैं तो इससे इसमें मौजूद पोषक तत्व या तो कम हो जाते हैं या नष्ट हो जाते हैं।

इसलिए पैकेट वाले दूध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इसे घर पर बार-बार गर्म करने की आवश्यकता नहीं है। आप इस दूध को 4 डिग्री तापमान पर सात दिनों तक आसानी से ठीक रख सकते हैं। आपने ध्यान दिया होगा कि दूध के पैक पर एक्सपायरी डेट लिखी होती है। उससे पहले दूध के खराब होने की संभावना कम ही होती है।

■   हर तरह की बीमारियों से रक्षा करते हैं ये 5 सुपरफूड, रोजाना खाएं
इस वेबसाइट में जो भी जानकारिया दी जा रही हैं, वो हमारे घरों में सदियों से अपनाये जाने वाले घरेलू नुस्खे हैं जो हमारी दादी नानी या बड़े बुज़ुर्ग अक्सर ही इस्तेमाल किया करते थे, आज कल हम भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में इन सब को भूल गए हैं और छोटी मोटी बीमारी के लिए बिना डॉक्टर की सलाह से तुरंत गोली खा कर अपने शरीर को खराब कर देते हैं। तो ये वेबसाइट बस उसी भूले बिसरे ज्ञान को आगे बढ़ाने के लक्षय से बनाई गयी है। आप कोई भी उपचार करने से पहले अपने डॉक्टर से या वैद से परामर्श ज़रूर कर ले। यहाँ पर हम दवाएं नहीं बता रहे, हम सिर्फ घरेलु नुस्खे बता रहे हैं। कई बार एक ही घरेलु नुस्खा दो व्यक्तियों के लिए अलग अलग परिणाम देता हैं। इसलिए अपनी प्रकृति को जानते हुए उसके बाद ही कोई प्रयोग करे। इसके लिए आप अपने वैद से या डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करे।
Previous articleशुगर की बीमारी में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं – Sugar Diet Chart In Hindi
Next articleदिल के रोगी क्या न खाएं, परहेज – Heart Patient Diet Chart In Hindi
Loading...

Leave a Reply