पाचनशक्ति-digestion

हमारे पाचन तंत्र को मजबूत करने और पाचन शक्ति में वृद्धि करने के कई उत्तम उपाय आयुर्वेद में प्राप्त होते हैं। हमारा पाचन तंत्र इस बात पर निर्भर करता है कि हम किस समय पर क्या खाते हैं? कैसे खाते हैं ? और किस समय पर खाते हैं? यह ऐसी ही सामान्य समस्याएं हैं, जिनके समाधान के बारे में विचार करना आवश्यक होता है, क्योंकि वर्तमान की खान-पान के गलत आदतों के कारण, ज्यादातर लोग पेट खराब होने, दस्त, सूजन, भोजन के बाद गैस बनना, कब्ज व थकान जैसी भिन्न-भिन्न प्रकार की पाचन समस्याओं से ग्रसित होते हैं। इन समस्याओं से बचाव करने के लिए, पाचन तंत्र का मजबूत होना बहुत आवश्यक है, इसलिए आप को यह जानकारी होना आवश्यक है कि आप अपनी पाचन शक्ति में किस प्रकार से वृद्धि कर सकते हैं?

कार्य करते हुए भोजन करना हानिकारक होता है आयुर्वेद के अनुसार

वर्तमान में हमारी व्यस्त दिनचर्या के कारण और समयाभाव की वजह से, हम अक्सर दोपहर का भोजन मल्टीटास्किंग के साथ करते हैं यानी कि काम करते हुए अपने मेज पर,या कहीं पर खड़े-खड़े ही खाने लगते हैं या फिर यातायात में ड्राइविंग करते हुए खाने लगते हैं, लेकिन हमारे शरीर को भोजन से प्राप्त, पोषक तत्वों का अवशोषण हमारे शरीर द्वारा करने के लिए, उचित वातावरण व मुद्रा की आवश्यकता होती है, इसलिए भोजन करते समय दूसरे अन्य कार्यों को विराम देना ही उचित होता है।

आयुर्वेदानुसार भोजन का पूरा आनंद लेना चाहिए

आयुर्वेद का कहना है कि सभी प्रकार के आहार का आनंद ठीक से लेना चाहिए, क्योंकि अच्छा आहार, हमारे शारीरिक स्वास्थ्य के साथ ही हमारी चेतना के उचित विकास के लिए अत्यंत आवश्यक होता है। जब हमारा ध्यान, भोजन की सुगंध पर, आहार के सेवन पर, उसके स्वाद पर, आहार को किस तरह बनाया गया है, इस पर रहता है, तो यह सारी स्थिति हमारी पाचन क्रिया में वृद्धि करने में बहुत लाभप्रद होती है। हमारा पेट भोजन करते समय आराम की मुद्रा में रहता है यदि हम नीचे बैठ कर भोजन करते हैं। आयुर्वेद के अनुसार भी भोजन करने का यह सबसे उचित तरीका होता है।

ठंडे पेय से परहेज करें पाचन शक्ति को बढ़ाने में

भोजन के समय या बाद में, ठंडे पेय पदार्थों का सेवन हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, इसलिए हमें सामान्य व कमरे के तापमान वाले, पानी, जूस या अन्य पेय पदार्थों का सेवन करना चाहिए। हमारी पाचन क्रिया को संतुलित रखना हमारे पाचन दोष की स्थिति से संबंधित होता है, जोकि प्रत्येक व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। भोजन के समय ठंडा पानी या बर्फयुक्त पानी हमारी पाचन अग्नि को शांत कर देता है। फ्रिज से निकाले गए, दूध या ठंडे जूस का सेवन भी हमारी पाचन ऊर्जा के लिए नुकसानदेह होता है। यह हमारी पाचन की अग्नि को शांत कर देता है, जिसके फलस्वरुप हमारी पाचन क्रिया दोषपूर्ण हो सकती है, इसलिए यदि आप अपनी पाचन शक्ति में वृद्धि करना चाहते हैं, तो भोजन के समय ठंडे पेय पदार्थों का सेवन ना करें।

आयुर्वेद के अनुसार पाचन शक्ति में वृद्धि के तरीके

आयुर्वेद का यह कहना है कि हमें अपने भोजन से पहले, ताजा अदरक को, थोड़े से नींबू रस और एक चुटकी नमक के साथ मिलाकर सेवन किया जाना चाहिए। यह हमारी पाचन ऊर्जा को संतुलित करने में उपयोगी होता है, साथ ही हमारे शरीर द्वारा, भोजन से पोषक तत्वों का सरलता से अवशोषण करके, जरूरी एंजाइमों का निर्माण हो सके, इसके लिए हमारी लार ग्रंथियों को सक्रिय बनाता है। पाचन ऊर्जा को नियमित करना इसलिए जरूरी होता है क्योंकि हमारे शरीर में भोजन के पाचन के लिए पाचन अग्नि होती है, जिसे पाचन ऊर्जा कहते हैं, यदि आप पाचन ऊर्जा में उचित सुधार से पहले ही भोजन ग्रहण करते हैं तो यह सुप्त व दुर्बल पाचन अग्नि भोजन के बाद, थकावट व आलस्य की समस्या उत्पन्न करती है।

भोजन करने का उचित समय क्या हो ?

आयुर्वेद के अनुसार, हमारी पाचन अग्नि सूर्य के साथ जुड़ी होती है, और हमारा शरीर और मन जिस अवस्था में रहता है, उसके साथ जुड़ा रहता है। इसलिए दोपहर के समय, जब सूर्य की गर्मी तीव्र होती है, उस समय हमारी पाचन ऊर्जा भी मजबूत होती है, इसलिए हमें दोपहर का भोजन 12 से 2 बजे के बीच अवश्य करना कर लेना चाहिए क्योंकि उस समय हमारी पाचन ऊर्जा ज्यादा तीव्र होती है, इसलिए दोपहर के भोजन का सेवन अधिक मात्रा में करना लाभप्रद होता है। जबकि रात्रि का भोजन 10 बजे रात्रि के बाद करने से, विषाक्त पदार्थ हमारी पाचन प्रणाली में एकत्रित हो जाते हैं, जिसके फलस्वरुप हमें अगले दिन आलस्य व थकान का अनुभव होता है, क्योंकि रात्रि के 10 बजे के बाद के पश्चात हमारा शरीर, भोजन से निकले विषैले पदार्थों को निष्कासित करने व समाप्त करने का कार्य करता है इसलिए हमें रात्रि का भोजन रात के 8 बजे तक कर लेना चाहिए और रात्रि का यह भोजन, दोपहर की भोजन की तुलना में कम मात्रा में व सुपाच्य होना चाहिए। भोजन की इस संपूर्ण प्रक्रिया के द्वारा ही, हमारी पाचन प्रणाली बिना किसी समस्या के उपयुक्त प्रकार से कार्य करती रहती है।

आयुर्वेदिक दवा त्रिफला लाभकारी है पाचन शक्ति की वृद्धि में

आयुर्वेदिक औषधि त्रिफला का निर्माण तीन महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियों – हरीतकी, आमलकी और बिभीतकी के मिश्रण से होता है। हमारे पाचन शक्ति के लिए, इसे एक रामबाण औषधि माना जाता है, क्योंकि त्रिफला का प्रयोग हमारे पेट के विषैले पदार्थों की सफाई करने में बहुत प्रभावकारी होता है। यह हमारे शरीर के विषैले पदार्थों को भी निष्कासित करने में उपयोगी होता है। त्रिफला कोलन को डिटॉक्सिफ़ाय करने में एक ताकतवर सूत्र या फार्मूला का कार्य करता है। इसका प्रयोग हमारे शरीर द्वारा पोषक तत्वों के उचित अवशोषण को बढ़ाने में भी सहायक होता है। इस प्रकार आयुर्वेदिक सूत्र त्रिफला हमारी पाचन शक्ति में वृद्धि के लिए, एक अत्यंत महत्वपूर्ण औषधि का कार्य करता है।

पाचन शक्ति में वृद्धि का उत्तम उपाय है लस्सी का प्रयोग

लस्सी या दही का सेवन, हमारे पाचन स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी होता है। हमारे पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने व पाचन स्वास्थ्य में सुधार करने के लिए, दही या लस्सी का प्रयोग सबसे अच्छा इलाज होता है, क्योंकि लस्सी में आवश्यक व अच्छे बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो भोजन को आसानी से पचाने में सहायक होते हैं, साथ ही लस्सी का प्रयोग सूजन और गैस की समस्या को कम करने में भी सहायक होता है, इसलिए भोजन के समय या भोजन के बाद लस्सी का सेवन करना, हमारे पाचन तंत्र के लिए बहुत गुणकारी व लाभप्रद होता है।

इस वेबसाइट में जो भी जानकारिया दी जा रही हैं, वो हमारे घरों में सदियों से अपनाये जाने वाले घरेलू नुस्खे हैं जो हमारी दादी नानी या बड़े बुज़ुर्ग अक्सर ही इस्तेमाल किया करते थे, आज कल हम भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में इन सब को भूल गए हैं और छोटी मोटी बीमारी के लिए बिना डॉक्टर की सलाह से तुरंत गोली खा कर अपने शरीर को खराब कर देते हैं। तो ये वेबसाइट बस उसी भूले बिसरे ज्ञान को आगे बढ़ाने के लक्षय से बनाई गयी है। आप कोई भी उपचार करने से पहले अपने डॉक्टर से या वैद से परामर्श ज़रूर कर ले। यहाँ पर हम दवाएं नहीं बता रहे, हम सिर्फ घरेलु नुस्खे बता रहे हैं। कई बार एक ही घरेलु नुस्खा दो व्यक्तियों के लिए अलग अलग परिणाम देता हैं। इसलिए अपनी प्रकृति को जानते हुए उसके बाद ही कोई प्रयोग करे। इसके लिए आप अपने वैद से या डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करे।
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