सामान्यतयाः कौड़ी का दर्द और नाभि टलना, ये दोनों ही आम बात है। लेकिन इनसे होनें वाला दर्द असहनीय होता है। कौड़ी का दर्द होनें पर रोगी ठीक तरह से खाना नहीं खा पाता, रोगी को भूख लगना बंद हो जाती है। हर वक़्त रोगी को बैचैनी और उल्टी होनें का अहसास होता रहता है।

कौड़ी और नाभि का दर्द किसी भी कारण से हो सकता है। नाभि के टलने पर रोगी को कब्ज़ हो सकती है, पानी पीते ही उल्टी हो सकती है यहाँ तक की भूख लगना बंद हो सकता है। कौड़ी और नाभि के दर्द में व्यक्ति कोई काम नहीं कर सकता हर वक़्त बैचैनी और नींद का अहसास होता रहता है।

इसलिए हम आयुर्वेद के खजानों में से आपके लिए कौड़ी और नाभि के दर्द का पक्का और आसान इलाज़ लेकर आये हैं।

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कौड़ी के दर्द, नाभि के दर्द के आयुर्वेदिक इलाज़, विकल्प और उपाय –

असली हींग (हीरा हींग) दो ग्रेन बीज रहित मुनक्का में लपेटकर एक घूंट पानी के साथ रोगी को खिला दें। पहली ही खुराक से कौड़ी का दर्द तुरंत शांत हो जाता है। यदि कुछ कमी रह जाए तो एक घंटे बाद दूसरी मात्रा दे सकते हैं। अत्यंत विश्वसनीय प्रयोग है।

विशेष – कौड़ी अर्थात् वह स्थान जहाँ छाती में दोनों तरफ कि पसलियाँ आपस में मिलती है। कौड़ी का दर्द साधारणतया बादी की चीज़ों के अत्यधिक सेवन से होता है।

परहेज़ – चावल, कच्चा दूध, दही, छाछ। जब तक भोजन न पचे तब तक रोगी को सोनें न दें। गेंहू का दलिया, गेहूँ की रोटी, मूंग की दाल खाने को दी जा सकती है।

इस प्रयोग में पेट दर्द और हिचकी तुरंत बंद होती है। योग ह्रदय-शूल में भी लाभप्रद है खासकर, जब पेट में गैस बनकर उपर की ओर ह्रदय-प्रदेश में दबाव दे रही हो।

विकल्प – आवश्यकतानुसार सौंफ़ का बारीक चूर्ण छ: ग्राम प्रातः ठण्डे पानी के साथ फाँक लें। एक ही बार के सेवन से दर्द शीघ्र दूर हो जायेगा, दूसरी बार सेवन की आवश्यकता ही न रहेगी।

नाभि का दर्द – नाभि के टलने पर और दर्द होने पर 20 ग्राम सौंफ़, गुड़ संभाग के साथ मिलाकर प्रातः खाली पेट खायें। अपनें स्थान से हटी हुई नाभि ठीक होगी।

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