महानगरों की भागदौड़ भरी जिंदगी में माइक्रोवेव अवन खास जरूरत बन गए हैं। तुरत-फुरत जायकेदार खाना बनाना हो या फिर फटाफट उसे गर्म करना हो, इसके लिए आजकल माइक्रोवेव को सबसे मुफीद समझा जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये माइक्रोवेव अवन का ज्यादा इस्तेमाल बेहद नुकसानदेह है, खासकर प्रेग्नेंट लेडीज़ के लिए। रिसर्च में साबित हो चुका है कि माइक्रोवेव से खतरनाक इलेक्ट्रो मैगनेट रेडिएशन होता है, जिससे पेट में पल रहे बच्चे तो नुकसान हो सकता है या मिस-कैरिज हो सकता है। इसके अलावा, आम लोगों की सेहत पर भी इसका खराब असर पड़ सकता है।

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माइक्रोवेव अवन से होनेवाले नुकसानों को लेकर दुनिया भर में रिसर्च की जा रही हैं। अमेरिका में जहां इस बारे में रिसर्च जारी हैं, वहीं यूरोपियन देशों में खुलकर इसका विरोध किया जा रहा है। यही वजह है कि 1976 में सोवियत रूस में माइक्रोवेव अवन पर रोक लगा दी गई थी। अमेरिका में एक स्टडी में पता चला है कि दो साल या उससे ज्यादा पुराने 56 फीसदी माइक्रोवेव अवन में रेडिएशन काफी बढ़ जाता है। इससे बांझपन, ब्रेस्ट कैंसर, नर्वस सिस्टम और डीएनए को नुकसान हो सकता है। मिस-कैरिज या कुपोषित बच्चे जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं।

फोटिर्स हॉस्पिटल में सीनियर गाइनॉकॉलजिस्ट शिवानी सचदेव के मुताबिक माइक्रोवेव अवन के ज्यादा इस्तेमाल से पेट में पल रहे बच्चे की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। उसके ब्रेन, हार्ट और लिंब्स आदि को नुकसान हो सकता है। प्रेग्नेंट लेडीज़ को सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि पेट में पल रहे बच्चे का हर सेल तेजी से डिवाइड होता है। इसके अलावा आम लोगों में भी उन सेल्स को नुकसान हो सकता है, जो तेजी से डिवाइड होते हैं, जैसे कि बोन मैरो के सेल। इससे सेल का डीएनए डेमेज हो सकता है और सेल अबनॉर्मल हो सकता है।

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वैसे, माइक्रोवेव अवन के नुकसान को लेकर तीन कैटिगरी में स्टडी की जा रही हैं – कैंसर में इसकी भूमिका, खाने की न्यूट्रिशन वैल्यू के गिरने और इससे निकलनेवाली वेव्स के तमाम नुकसान। कैंसर के बारे में जहां अभी स्टडी चल रही हैं, वहीं अब तक हुई स्टडी के मुताबिक माइक्रवेव अवन खाने में विटामिन बी, सी और ई, वाइटल एनर्जी और न्यूट्रिशन कम करते हैं। वैसे, माइक्रोवेव अवन के इस्तेमाल से मुंह जलने के मामले भी सामने आए हैं क्योंकि इसमें बाहर से बर्तन ठंडा रहता है, जबकि अंदर रखी खाने-पीने की चीज बेहद गर्म हो जाती है। छोटे बच्चों की दूध की बोतल माइक्रोवेव में कभी गर्म नहीं करनी चाहिए।

सीनियर डॉक्टर के. के. अग्रवाल का कहना है कि जबसे इलेक्ट्रो मैगनेटिक रेडिएशन पैदा करनेवाली चीजे मसलन मोबाइल, माइक्रोवेव अवन, कंप्यूटर आदि आए हैं, कैंसर बढ़े हैं। हालांकि इनका सीधा कोई नाता है या नहीं, इस बारे में अभी स्टडी की जा रही हैं। लेकिन इससे खाने की न्यूट्रिशनल वैल्यू तो कम होती ही है।

माइक्रोवेव अवन से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए कई तरह के उपकरण और चीजें भी बाज़ार में आ गई हैं। ऐसा ही खास तरह का एप्रैन बनानेवाली आइबा कंपनी के जॉइंट एमडी गिरीश चंद कहते हैं कि माइक्रोवेव अवन अगर 5 मेगावॉट का है तो उससे इंसुलिन बनना बंद होने का खतरा होता है, जिससे डायबीटीज हो सकती है। इसी तरह 1/20 मेगावॉट से मेमरी लॉस, 1/100 से कैंसर, 1/1000 से ब्रेन ट्यूमर और दिल की बीमारी का खतरा हो सकता है। उनका दावा है कि ग्रेफाइड बेस्ड एप्रैन पहनने से हानिकारक रेडिएशन का असर 90 फीसदी तक कम हो जाता है, इसीलिए काफी लोग इसे खरीद रहे हैं।

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कैसे करता है अवन काम: माइक्रोवेव अवन में माइक्रोवेव रेडिएशन के जरिए खाने में मौजूद मॉलिक्यूल (अणु) आपस में टकराते हैं, जिससे गर्मी पैदा होती है और खाना जल्द बनता है। ये माइक्रोवेव्स इलेक्ट्रोमैगनेटिक स्पेक्ट्रम का हिस्सा हैं और नॉन-मेटल बरतनों से आसानी से पास हो जाती हैं। इसमें न किसी तरह की गंध होती है और न ही ये दिखती हैं। ऐसे में इन्हें पहचाना मुश्किल है। खास यह है कि माइक्रोवेव अवन ऑन करने पर ही रेडिएशन होता है और स्विच ऑफ करने पर रुक जाता है, लेकिन जब यह ऑन होता है तो शरीर को नुकसान पहुंचाता है।

शोधकर्ताओं का निष्कर्ष है कि माइक्रोवेव में पकाए या गर्म किए गए भोजन पदार्थ के स्वास्थ्यवर्द्धक गुण अत्यधिक कम हो जाते हैं। माइक्रोवेव ओवन में खाद्य पदार्थ की पौष्टिकता 60 से 90 प्रतिशत तक कम हो जाती…

शोधकर्ताओं का निष्कर्ष है कि माइक्रोवेव में पकाए या गर्म किए गए भोजन पदार्थ के स्वास्थ्यवर्द्धक गुण अत्यधिक कम हो जाते हैं। माइक्रोवेव ओवन में खाद्य पदार्थ की पौष्टिकता 60 से 90 प्रतिशत तक कम हो जाती है और भोजन का संरचनात्मक विघटन तेज हो जाता है।

* व्यक्ति की बैक्टीरिया और विषाणुओं जनित रोगों से लड़ने की शक्ति क्षीण हो जाती है।

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* मोतियाबिंद हो जाता है। चूंकि नेत्रों के कार्निया में रक्त वाहिनियां नहीं होती है अत: तापमान नियंत्रित करने की क्षमता नहीं होती, इसलिए कार्निया की कोशिकाएं तापमान तथा अन्य तनावों को वहन नहीं कर पाता है। सन् 1950 में हिर्श और पारकर ने माइक्रोवेव ओवन से होने वाला पहला मोतियाबिंद प्रकरण खोजा था। उसके पश्चात् अन्य उपकरणों से निकले इसी तरह के विकिरण से होने वाले मोतियाबिंद के प्रकरण अन्यों ने भी देखें।

* जन्मजात शारीरिक विकलांगता तथा अन्य गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

* माइक्रोवेव की किरणें दूध और दालों में कैंसरकारक एजेंट्स की रचना करती है।

* माइक्रोवेव किए गए खाद्य पदार्थों के उपयोग से व्यक्ति के रक्त में कैंसर कोशिकाओं की संख्या बढ़ जाती हैं।

* माइक्रोवेव की किरणें खाद्य पदार्थों में ऐसे परिवर्तन कर देती हैं, जिसके कारण पाचन संबंधी विकार हो जाते हैं।

* माइक्रोवेव किए गए खाद्य पदार्थ में हुए रासायनिक परिवर्तनों के कारण मानव शरीर के लिंफेटिक सिस्टम का कार्य कमजोर पड़ जाता है। परिणामस्वरूप कैंसर की वृद्धि को रोकने में सक्षम शरीर की क्षमता प्रभावित होती है।

* माइक्रोवेव ओवन में अत्यंत कम समय में ही कच्चे, पकाए हुए अथवा फ्रीज की हुई सब्जियों के मौलिक तत्व टूट जाते हैं और फ्री रेडिकल बन जाते हैं। परिणामत: कोशिकाओं की बाहरी दीवार कमजोर हो जाती है। त्वचा में झुर्रियां और शरीर में बुढ़ापा जल्दी आता है। यहां तक कि त्वचा का कैंसर भी संभव है। माइक्रोवेव किए गए खाद्य पदार्थों के उपयोग से व्यक्ति में पेट और आंतों में कैंसर तत्वों की वृद्धि हो सकती है। अमेरिका में कोलन कैंसर की तीव्र गति से बढ़ी हुई दर के लिए वैज्ञानिक माइक्रोवेव ओवन को दोषी मानते हैं।

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* माइक्रोवेव किए गए खाद्य पदार्थों के उपयोग से विटामिन बी, सी, इ एवं आवश्यक खनिज और लाइपोट्रॉपिक्स को उपयोग करने की शरीर की क्षमता कम हो जाती है।

* माइक्रोवेव ओवन में गर्म किए गए मांसाहारी व्यंजन में डी-नाइट्रोसोडीइथेनोलामाइन नामक कैंसरकारी रसायन उत्पन्न होता है।

* यदि माइक्रोवेव ओवन में पकाए भोजन को रोज खाया जाए तो वह मस्तिष्क के उत्तकों में दीर्घावधि और स्थायी नुकसान करता है।

* माइक्रोवेव ओवन में पकाए गए भोजन के अनजाने उत्पादों की चयापचय क्रिया करना मानव शरीर के लिए संभव नहीं होता और वे विजातीय पदार्थ शरीर में एकत्रित होते रहते हैं।

* यदि माइक्रोवेव ओवन में पकाए भोजन को रोज खाया जाए तो स्त्री और पुरुष के हारमोंस निर्माण पर असर पड़ता है।

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* माइक्रोवेव ओवन में पकाई गई सब्जियों में विद्यमान खनिज कैंसरकारी फ्री रेडिकल्स में परिवर्तित हो जाते हैं।

* यदि माइक्रोवेव ओवन में पकाए गए भोजन को रोज खाया जाए तो व्यक्ति की स्मरणशक्ति, बौद्धिक क्षमता और एकाग्रता कमजोर हो जाती है तथा भावनात्मक अस्थिरता बढ़ जाती है।

* कई देशों में माता के दूध को फ्रीज में सुरक्षित रखा जाता है और जरूरत पड़ने पर पिलाने से पूर्व उसे गर्म किया जाता है। पिडियाट्रिक शोध में ज्ञात हुआ कि दूध को माइक्रोवेव ओवन में गर्म करने पर लाइसोजाइम नामक अत्यंत महत्वपूर्ण रोगाणुनाशक एंजाइम की सक्रियता कम हो जाती है। एंटीबॉडीज कम हो जाती है तथा घातक बैक्टेरिया बढ़ जाते हैं। दूध को 72 डिग्री तक गर्म करने पर 96 प्रतिशत इम्यूनोग्लूबिन ए एंटीबॉडीज नष्ट हो जाती है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सूक्ष्म जीवाणु से लड़ते हैं।

* लेसेंट के एक अन्य शोध के अनुसार शिशु के भोजन को 10 मिनट तक माइक्रोवेव करने पर उसमें मौजूद एमिनो एसिड की संरचना बदल जाती है।

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कैसे करें बचाव :

  • अवन पुराना होने पर रेडिएशन मीटर से नियमित जांच कराएं कि रेडिएशन ज्यादा तो नहीं हो रहा।
  • पूरा खाना पकाने के बजाय सिर्फ गर्म करने के लिए इस्तेमाल करें।
  • खाना गर्म करते हुए बार-बार खोले नहीं क्योंकि तब वेव्स सीधे बॉडी पर असर करती हैं।
  • इस्तेमाल करते हुए दूरी बनाए रखें, क्योंकि इसकी वेव्स 12 सेंमी तक ही पहुंचती हैं।
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