पथरी की समस्या अब हर घर की समस्या बनती जा रही है। ये रोग कष्टदायी रोग है। जिसमें रोगी को भंयकर दर्द से गुजरना पड़ता है। पहले यह समस्या 30 से 60 वर्ष की आयु के लोगों में पाई जाती थी लेकिन अब कम उम्र के लोगों को भी पथरी की समस्या होने लगी है। जिसके कई कारण हैं। महिलाओं की उपेक्षा पुरूषों में पथरी की समस्या अधिक होती है। वैसे तो इस रोग में कई आयुवेर्दिक उपाय हैं लेकिन सबसे ज्यादा कारगर उपाय है कुलथी की दाल जिसे गैथ भी कहा जाता है। उत्तराखंड में इस दाल का काफी प्रचलन है। यह दाल पथरी को खत्म करने का एक कारगर औषधि है।

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कुलथी दाल क्या है?

यह दाल पथरीनाशक है। कुलथी की दाल में विटामिन ए पाया जाता है जो शरीर में पथरी को गलाने में सहायक है। गुर्दे की पथरी और पित्ताशय की पथरी को खत्म करने में फायदेमंद होती है।

कुलथी की दाल आपको किसी भी दुकान में मिल जाती है। यदि नहीं मिलती है तो यह दाल आप किसी उत्तराखंड निवासी से मंगवा सकते हैं। पहाड़ों में यह दाल काफी मात्रा में पाई जाती है।

कैसे करें कुलथी का इस्तेमाल

कुलथी की दाल को 250 ग्राम मात्रा में लें और इसे अच्छे से साफ कर लें। और रात को 3 लीटर पानी में भिगों कर रख दें। सुबह होते ही इस भीगी हुई दाल को पानी सहित हल्की आग में 4 घंटे तक पकाएं। और जब पानी 1 लीटर रह जाए तब उसमें 30 ग्राम देशी घी का छोंक लगा दें। और उसमें काली मिर्च, सेंधा नमक, जीरा और हल्दी डाल सकते हो।

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कब करें कुलथी का सेवन

कुलथी के पानी को दिन में दोपहर के खाने की जगह ले सकते हो। इसे सूप की तरह पीएं। 1 से 2 सप्ताह तक नियमित एैसा करने से मूत्राशय और गुर्दे की पथरी गल कर बाहर आ जाती है।

कुलथी की दाल का सेवन करने से कमर का दर्द ठीक हो जाता है।

गुर्दे में यदि सूजन हो तो कुलथी के इस पानी को अधिक से अधिक पीएं।

सूप के साथ रोटी का सेवन भी कर सकते हो।

पथरी में और क्या खांए

पथरी में कुल्थी के अलावा आप खरबूजे के बीज, मूली, आंवला, जौ, मूंग की दाल और चोलाई की सब्जी भी खा सकते हो। साथ ही रोज 5 से 8 गिलास सादा पानी रोज पीएं।

किस चीज से परहेज करें

पथरी के रोगी को उड़द की दाल, मेवे, चाकलेट, मांसाहार, चाय, बैगन, टमाटर और चावल नहीं खाने चाहिए।

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कुल्थी का पानी बनाने का तरीका

250 ग्राम पानी में 20 ग्राम कुल्थी की दाल को डालें। और रात में ढक कर रख लें। सुबह इस पानी को अच्छे से मिलाकर खाली पेट पी लें।
जिस इंसान को पथरी एक बार हो जाती है, उसे दोबारा होने का खतरा होता है । इसलिए पथरी निकालने के बाद भी रोगी को कुल्थी का कभी-कभी सेवन करते रहना चाहिए । कुल्थी पथरी में औषधि के समान है।

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