मुँह के छाले होना एक आम बात है लेकिन इसकी पीड़ा बड़ी कष्टदेय है। मुँह में छालें होनें से ठीक तरह से व्यक्ति खाना नहीं खा सकता। मुँह मे आग सी लगी रहती है। जीभ पर छाले होनें से व्यक्ति खाना तो क्या, ठीक तरह से बोल भी नहीं पाता है।

मुँह में छाले होना किसी अभिशाप से कम नहीं। असहनीय दर्द न ठीक से खाने देता है और ना ही ठीक तरह से सोने देता है। इसीलिए हम आपके लिए लेकर आये है मुँह के छालों के रामबाण आयुर्वेदिक इलाज़ और तरीक़े

मुँह के छालों के आयुर्वेदिक इलाज़ और तरीक़े –

छोटी हरड़ को बारीक पीसकर छालों पर लगानें से मुँह तथा जीभ के छालों से छुटकारा मिलता है तथा मुखपाक मिटता है। जो छाले किसी भी दवा से ठीक नहीं हो रहे हों इस दवा के लगाने से निश्चय ही ठीक हो जायेंगे। दिन में दो-तीन बार लगायें।

विशेष –

  • दो ग्राम भुना हुआ सुहागा का बारीक चूर्ण पंद्रह ग्राम ग्लीसरीन में मिलाकर रख लें। दिन में दो-तीन बार मुँह एवं जीभ के छालों पर लगायें। शीघ्र लाभ होगा।
  • तुलसी की चार-पाँच पत्तियाँ नित्य सुबह और शाम चबाकर ऊपर से दो घूँट पानी पीयें। मुँह के छाले व मुँह की दुर्गन्ध दूर होती है। चार-पाँच दिन खायें।
  • रात को भोजन के पश्चात एक छोटी हरड़ चूसें। इससे आमाशय और आन्तड़ियों के दोषों के कारण महीनों ठीक न होनें वाले मुँह व जीभ के छाले ठीक हो जाते है। हरड़ को चूसते रहने से पाचक अंग शक्तिशाली बन जाते है। हरड़ को चूसते रहने से पाचक अंग शक्तिशाली बन जाते है, पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं।

mouth-ulcer

बच्चों के मुँह के छाले

मिश्री को बारिक पीसकर उसमें थोड़ा-सा कपूर मिलाकर मुँह में लगाए या बुरकाएं । (मिश्री 8 भाग, कपूर 1 भाग) इससे मुँह के छाले और मुँहपाक मिटता है। यह दवा बच्चों के मुँह आने पर बहुत लाभकारी है।

बार-बार मुँह में छाले होना

टमाटर के रस में ताज़ा पानी मिलाकर कुल्ली करने से मुँह, होंठ और जीभ के छाले दूर हो जाते है।

मुखपाक होनें पर

चार ग्राम फूले हुए सुहागे का बारीक चूर्ण, छ: ग्रेन (तीन रत्ती) कपूर, बारह ग्राम ग्लीसरीन में मिश्रित कर किसी शीशी में भर लें और आवश्यकता के समय मुँह के भीतर घाव पर लगायें। शीघ्र लाभ होगा। जीभ, होंठ और मुँह के छालों और घावों के लिए जिसे मुँह का आ जाना कहते हैं, यह श्रेष्ठ दवा है।

 
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