gorakhmudi

गोरख मुंडी एक वर्षीय, प्रसर वनस्पति है, जो धान के खेतों तथा अन्य नम स्थानों में वर्षा के बाद निकलती है, यह किंचित लसदार, रोमश और गंध युक्त होती है।इसमें कांड पक्षयुक्त, पत्र विनाल, कांडलग्न और प्राय: व्यस्त लट्वाकार और पुष्प सूक्ष्म ‘किरमजी’ रंग के और मुंडकाकार व्यूह में पाए जाते हैं, यह कटुतिक्त, उष्ण, दीपक, कृमिघ्न, मूत्रजनक रसायन और वात तथा रक्त विकारों में उपयोगी मानी जाती है, इसमें कालापन लिए हुए लाल रंग का तेल और कड़वा सत्व होता है।

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इसका तेल त्वचा और वृक्क द्वारा नि:सारित होता है, अत: इसके सेवन से पसीने और मूत्र में एक प्रकार की गंध आने लगती है, मूत्रजनक होने और मूत्रमार्ग का शोधन करने के कारण मूत्रेंद्रिय के रोगों में इससे अच्छा लाभ होता है, गर्भाशय, योनि सम्बन्धी अन्य बीमारियों, पथरी-पित्त, सिर की आधाशीशी आदि में भी यह अत्यन्त लाभकारी औषधि है।

गोरख मुंडी को संस्कृत में इसकी श्रावणी महामुण्डी अरुणा, तपस्विनी तथा नीलकदम्बिका आदि कई नाम हैं। यह अजीर्ण, टीबी, छाती में जलन, पागलपन, अतिसार, वमन, मिर्गी, दमा, पेट में कीड़े, कुष्ठरोग, विष विकार, असमय बालो का सफ़ेद होना, आँखों के रोग आदि में तो लाभदायक होती ही है, इसे बुद्धिवर्द्धक भी माना जाता है, गोरखमुंडी की गंध बहुत तीखी होती है।

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गोरख मुंडी एक एसी औषधि है जो आंखो को जरूर शक्ति देती है,अनेक बार अनुभव किया है, आयुर्वेद मे गोरख मुंडी को रसायन कहा गया है, आयुर्वेद के अनुसार रसायन का अर्थ है वह औषधि जो शरीर को जवान बनाए रखे।

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आँखों के रोग

गोरख मुंडी के चार ताजे फल तोड़कर भली प्रकार चबायें और दो घूंट पानी के साथ इसे पेट में उतार लें तो एक वर्ष तक न तो आंख आएगी और न ही आंखों की रोशनी कमजोर होगी, गोरखमुंडी की एक घुंडी प्रतिदिन साबुत निगलने कई सालों तक आंख लाल नहीं होगी।

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कुष्ठ रोग

कुष्ठ रोग होने पर गोरख मुंडी का चूर्ण और नीम की छाल मिलाकर काढ़ा तैयार कीजिए, सुबह-शाम इस काढ़े का सेवन करने से कुष्ठ रोग ठीक हो जाता है।

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बवासीर

गोरख मुंडी का प्रयोग बवासीर में भी बहुत लाभदायक माना गया है, गोरख मुंडी की जड़ की छाल निकालकर उसे सुखाकर चूर्ण बनाकर हर रोज एक चम्मच चूर्ण लेकर ऊपर से मट्ठे का सेवन किया जाये तो बवासीर पूरी तरह समाप्त हो जाती है, जड़ को सिल पर पीस कर उसे बवासीर के मस्सों में तथा कण्ठमाल की गाठों में लगाने से बहुत लाभ होता है, पेट के कीड़ों में भी इस की जड़ का पूर्ण प्रयोग किया जाता है, उससे निश्चित लाभ मिलता है।

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दिल दिमाग लीवर

गोरख मुंडी के पौधे उखाड़कर उनकी सफाई करके छाये में सुखा लें, सूख जाने पर उसे पीस लीजिए और घी चीनी के साथ हलुआ बनाकर खाइए, इससे इससे दिल, दिमाग, लीवर को बहुत शक्ति मिलती है।

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गोरख मुंडी से औषिधि बनाने का तरीका

गोरख मुंडी के पौधे की जड़ का चूर्ण बना कर आधा-आधा चम्मच सुबह शाम दूध के साथ प्रयोग करे, बाकी के पौधे का पानी मिलाकर रस निकाल ले, इस रस से 25% अर्थात एक चौथाई घी लेकर पका ले, इतना पकाए कि केवल घी रह जाए, यह भी आंखो के लिए बहुत गुणकारी है,,बाजार मे साबुत पौधा या जड़ नहीं मिलते, केवल इसका फल मिलता है, वह प्रयोग करे, 100 ग्राम गोरख मुंडी लाकर पीस ले, बहुत आसानी से पिस जाती है, इसमे 50 ग्राम गुड मिला ले, कुछ बूंद पानी मिलाकर मटर के आकार की गोली बना ले, यह काम लोहे की कड़ाही मे करना चाहिए, न मिले तो पीतल की ले, जो अधिक गुणकारी बनाना चाहे तो ऐसे करे, 300 ग्राम गोरखमुंडी ले आए लाकर पीस ले, 100 ग्राम छन कर रख ले, बाकी बची 200 ग्राम गोरख मुंडी को 500 ग्राम पानी मे उबाले, जब पानी लगभग 300 ग्राम बचे तब छान ले, साथ मे ठंडी होने पर दबा कर निचोड़ ले।

इस पानी को मोटे तले कि कड़ाही मे डाले, उसमे 100 ग्राम गुड कूट कर मिलाकर धीमा धीमा पकाए। जब शहद के समान गाढ़ा हो जाए तब आग बंद कर दे, जब ठंडा जो जाए तो देखे कि काफी गाढ़ा हो गया है।,यदि कम गाढ़ा हो तो थोड़ा सा और पका ले, फिर ठंडा होने पर इसमे 100 ग्राम बारीक पीसी हुई गोरख मुंडी डाल कर मिला ले, अब 50 ग्राम चीनी/मिश्री मे 10 ग्राम छोटी इलायची मिलाकर पीस ले, छान ले। हाथ को जरा सा देशी घी लगा कर मटर के आकार कि गोली बना ले, गोली बना कर चीनी इलायची वाले पाउडर मे डाल दे ताकि गोली सुगंधित हो जाए, 3 दिन छाया मे सुखाकर प्रयोग करे, इलायची केवल खुशबू के लिए है।

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गोरख मुंडी सेवन करने का तरीका

1-1 गोली 2 समय गरम दूध से हल्के गरम पानी से दिन मे 2 बार ले, सर्दी आने पर 2-2 गोली ले सकते हैं, इसका चमत्कार आप प्रयोग करके ही अनुभव कर सकते हैं। आंखे तो ठीक होती ही है साथ ही रात दिन परिश्रम करके भी थकावट महसूस नहीं होगी, कील, मुहाँसे, फुंसी, गुर्दे के रोग सिर के रोग सभी मे लाभ करेगी, जिनहे पेशाब कम आती है या शरीर के किसी हिस्से से खून गिरता है तो ठंडे पानी से ले, इतनी सुरक्षित है कि गर्भवती को भी दे सकते हैं, ध्यान रहे 2-4 दिन मे कोई लाभ नहीं होगा, लंबे समय तक ले, गोली को अच्छी तरह सूखा ले, अन्यथा अंदर से फफूंद लग जाएगी।

ध्यान रखें – ये पाचन शक्ति बढ़ाती है इसलिए भोजन समय पर खाए, चाय पी कर भूख खत्म न करे, चाय पीने से यह दवाई लाभ के स्थान पर हानि करेगी।

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