आज आपको बताएँगे भारतीय रसोई में पाये जाने वाले एक ऐसे मसाले के बारे में, जिसके अनेको औषिधियाँ गुण हैं। जिसको हम अक्सर अपने खान पान में इस्तेमाल करते हैं, मगर इसके आयुर्वेदिक गुणों के बारे में ज़्यादा परिचित नहीं हैं। तो आइये जाने इस मसाले के बारे में।

परिचय

भारतीय रसोई घर और मसाले तथा इनमे लौंग और लौंग की उपयोगिता को कौन नहीं जानता। लौंग को दादी नानी के नुस्खों में एक विशेष स्थान प्राप्त है। लौंग (Clove, Lawang, Devkusum) का प्रयोग मसाले के तौर पर प्राचीन काल से होता चला आ रहा है। अलग-अलग स्थानों एवं भाषाओं में लौंग को भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता है। लौंग का रंग काला होता है। यह एक खुशबूदार मसाला है। जिसे भोजन में स्वाद के लिए डाला जाता है। लौंग का उद्गम स्थान इंडोनेशिया को माना जाता है। ऐतिहासिक रूप से लौंग का पेड़ मोलुक्का द्वीपों का देशी वृक्ष है, जहाँ चीन ने ईसा से लगभग तीन शताब्दी पूर्व इसे खोजा और अलेक्सैन्ड्रिया में इसका आयात तक होने लगा। आज जंजीबार लौंग का सबसे अधिक उत्पादन करने वाला देश है। लौंग का अधिक मात्रा में उत्पादन जंजीबार और मलाक्का द्वीप में होता है। इसका उपयोग भारत और चीन में 2000 वर्षों से भी अधिक समय से हो रहा है। लौंग का उत्पादन मुख्य रूप से इंडोनेशिया, मेडागास्कर, भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका आदि देशों में होता है। आपको शायद यह जानकर आश्चर्य हो कि अठारहवीं शताब्दी में ब्रिटेन में लौंग का मूल्य उसके वजन के सोने के बराबर हुआ करता था।

Clove

लौंग का वृक्ष

लौंग मध्यम आकार का सदाबहार वृक्ष से पाया जाने वाला, सूखा, अनखुला एक ऐसा पुष्प अंकुर होता है जिसके वृक्ष का तना सीधा और पेड़ भी 10-12 मीटर की ऊँचाई वाला होता है और जिसके पत्ते बड़े-बड़े तथा दीर्घवृताकार होते हैं। इसके पेड़ को लगाने के आठ या नौ वर्ष के बाद ही फल देते है। लौंग के पेड़ों के शाखों के अन्तिम छोरों में लौंग के फूल समूह में खिलते हैं। लौंग की कलियों का रंग खिलना आरम्भ होते समय पीला होता है जो कि धीरे-धीरे हरा होते जाता है और पूर्णतः खिल जाने पर इसका रंग लाल हो जाता है। इन कलियों में चार पँखुड़ियों के मध्य एक वृताकार फल होता है।

लौंग के प्रकार

लौंग, जिसे कि लवांग के नाम से भी जाना जाता है, Myrtaceae परिवार से सम्बन्धित एक पेड़ की सूखी कली को कहते हैं जो कि खुशबूदार होता है। लौंग उष्ण प्रकृति का मसाला है। लौंग दो प्रकार के होते हैं। एक काले रंग की एवं दूसरी नीले रंग की। आमतौर पर घरों में मसाले के तौर पर इस्तेमाल होने वाला लौंग काले रंग का होता है। नीले रंग का लौंग अधिक तैलीय होता है अत: इनसे मशीन द्वारा तेल निकाला जाता है जिनका उपयोग चिकित्सा में किया जाता है। इसके पत्ते भी मसाले के तौर पर इस्तेमाल किये जाते हैं। लवंग एक खुशबूदार मसाला होता है।

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