पानी शरीर का सार है, हमारे शरीर का 75 % पानी ही है, हमको दिन भर में कम से कम 8-१० गिलास पानी अवश्य पीना चाहिए, मगर कुछ घड़ियाँ ऐसी होती हैं जिनमे पानी पीना अनेक रोगों को आकर्षित करता है, ऐसे में इसका पूरा ख्याल रखें. आइये जाने…

भूखे पेट व्रत खोलते ही,

बिलकुल सोते हुए,

मेहनत करके निबटते हुए,

शौच के आते ही

पसीने में आते ही,

लघुशंका (मूत्र) करते ही,

चलकर थके हुए हों तो,

दूध के पीते ही,

भोजन करते ही,

चाट खाते ही,

चाय पीते ही,

चना खाते ही,

उपरोक्त परिस्थितियों में अचानक से पानी नहीं पीना चाहिए. जैसे ही शरीर का तापमान सामान्य हो तब ही जल ग्रहण करें. अन्यथा शरीर और पानी का तापमान भिन्न होने के कारण शारीर रोगों कि चपेट में आ सकता है.

भोजन के तत्काल बाद गले में खुश्की जैसा लगता है, उससे विचलित होने के बजाये उसे सहन करने कि आदत डालनी चाहिए, जो लोग भोजन के तत्काल बाद पानी पीते हैं, वे लगभग एक घंटे तक सब्र रखें.

इस वेबसाइट में जो भी जानकारिया दी जा रही हैं, वो हमारे घरों में सदियों से अपनाये जाने वाले घरेलू नुस्खे हैं जो हमारी दादी नानी या बड़े बुज़ुर्ग अक्सर ही इस्तेमाल किया करते थे, आज कल हम भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में इन सब को भूल गए हैं और छोटी मोटी बीमारी के लिए बिना डॉक्टर की सलाह से तुरंत गोली खा कर अपने शरीर को खराब कर देते हैं। तो ये वेबसाइट बस उसी भूले बिसरे ज्ञान को आगे बढ़ाने के लक्षय से बनाई गयी है। आप कोई भी उपचार करने से पहले अपने डॉक्टर से या वैद से परामर्श ज़रूर कर ले। यहाँ पर हम दवाएं नहीं बता रहे, हम सिर्फ घरेलु नुस्खे बता रहे हैं। कई बार एक ही घरेलु नुस्खा दो व्यक्तियों के लिए अलग अलग परिणाम देता हैं। इसलिए अपनी प्रकृति को जानते हुए उसके बाद ही कोई प्रयोग करे। इसके लिए आप अपने वैद से या डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करे।
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