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आंतो का कैंसर, ब्लड कैंसर, कंठ(गले) का कैंसर, हड्डियों का कैंसर आदि अनेक प्रकार के कैंसर के लिए बहुत उपयोगी हैं दालचीनी और कलौंजी। आइये जाने इस रोग में इनको उपयोग की विधि और इन पर किये गए शोध।

■   रात को इसकी 1 चम्मच लेने से गठिया, घुटनो का दर्द, सायटिका, गर्दन व कमर का दर्द, हाथ पैरों में सुन्नता, दमा, पुरानी खाँसी आदि 80 रोगों का जड़ से सफ़ाया करती है

कैंसर में दालचीनी के प्रयोग

जापान व ऑस्ट्रेलिया में एक शोध में या पता चला हैं के जब रोगियों को एक चम्मच शहद में एक छोटा चाय वाला चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर एक महीने तक प्रतिदिन तीन बार दिया गया तो पेट और हड्डियों का विकसित कैंसर सफलतापूर्वक ठीक हो गया।

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दो चम्मच शहद में एक चम्मच दालचीनी मिलाकर नित्य तीन बार चाटने से हर प्रकार के कैंसर में लाभ होता हैं।
कैंसर के घावों में बहुत दर्द और बदबू रहने पर दालचीनी का काढ़ा नित्य पीना चाहिए। एक किलो पानी में चार चम्मच दालचीनी पाउडर डालकर उबाले, 750 ग्राम पानी रहने पर छानकर दिन भर में थोड़ा थोड़ा कर के पीना चाहिए।

कैंसर में कलौंजी का प्रयोग

आंतो का कैंसर, ब्लड कैंसर, कंठ का कैंसर, आदि अनेक प्रकार के कैंसर से मुक्ति पाने के लिए एक गिलास अंगूर के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में तीन बार – सुबह नाश्ते से एक घंटे पहले, दोपहर में भोजन के एक घंटे के बाद, रात में खाने के कम से कम एक घंटे के बाद सोते समय पियें।

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एक किलो जौं में दो किलो गेंहू का आटा मिलाकर इसकी रोटी या दलिया बनाकर रोगी को देना चाहिए। इस प्रकार 40 दिन तक चिकित्सा करनी चाहिए। आलू, अरबी और बैंगन का उपयोग ना करे।

कलौंजी के बीजो में कैरोटीन होता हैं जिसे यकृत(लीवर) विटामिन ऐ में बदल देता हैं, जिसकी क्रिया कैंसर रोधक हैं। कैंसर रोगी हलवा बनाते समय कलौंजी के बीज डालकर हलवा बनाकर खाए।

■   कलौंजी का तेल है अमृत के समान तभी एक कहावत मशहूर है कि मौत को छोड़ कर हर मर्ज की दवा है कलौंजी
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