Blood Cancer कोशिकाओ को 24 घंटे में नष्ट किया जा सकता है !!!

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ब्लड कैंसर का इलाज इन हिंदी

अगर वैज्ञानिकों की नयी खोज पर विश्‍वास करें तो अंगूर के बीज से Blood Cancer (LEUKEMIA) का इलाज महज 24 घंटों में संभव है। अंगूर का बीज आपको ब्लड कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बचाने के लिए तैयार है। बता रहें हैं आज आपको श्री बलबीर सिंह जी शेखावत – Sen. Pharmacologist – Govt. Hospital – Distt – Sikar – Rajasthan.

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क्‍या कहते हैं वैज्ञानिक

University Of Kentucky United State में एक शोध हुआ जो बाद में Clinical Cancer Research में प्रकाशित भी हुआ इस शोध के अनुसार जब Blood Cancer की कोशिकाओ को अंगूर के बीजो के अर्क (Grapeseed Extract) के संपर्क में रखा गया तो Blood Cancer की कोशिकाए अपने आप एक प्रकिया से नष्ट होने लगी जिसे APOPTOSIS कहते है, ये एक प्रकार की कोशिका की अपने आप द्वारा किया गया SUICIDE होता है. लेबोरेटरी में हुई इस study में 76% Blood Cancer की कोशिकाओ ने मात्र 24 घंटो में Suicide अर्थात अपने आप को नष्ट कर लिया। और इसमें एक विशेष बात देखी गयी के इस पूरे प्रयोग के दौरान पाया गया की सामान्य कोशिकाओं को कोई नुकसान नही होता।

केलीफोर्निया यूनिवर्सिटी के मेडिकल फिजिक्स एवं साइकोलॉजी के सीनियर प्रोफेसर डॉ. हर्डिन बी जॉन्स का कहना है कि

“Cancer के इलाज के तौर पर प्रयुक्‍त होने वाली chemotherapy, सर्जरी, रेडिएशन के काफी साइड इफ़ेक्ट है जो के किसी भी इंसान को लंबे समय तक दी जाने के बाद उसकी पीड़ादायक मौत का कारण बनती है। इसकी तुलना में untreated patient अर्थात जिनको ये पद्धति से उपचार नहीं किया जाता वो लम्बा जीवन जीते है। जबकि कुछ प्राकृतिक उपचार ऐसे हैं जिनके प्रयोग से ना सिर्फ दर्द बल्‍कि कैंसर को जड़ से खत्म किया जा सकता है।” उसी सिलसिले में उन्‍होंने प्राकृतिक उपचारों में अंगूर के बीजों का उल्लेख किया।

यह लेख The Telegraph News – U.K. में प्रकाशित हो चूका है.

अंगूर के बीज का अर्क कैसे blood cancer को खत्म करता है ? Grape seed extract

इसका मूल कारण अंगूर के बीजो में पाए जाने वाले antioxidant जिनमे मुख्य RESVERATROL है जो कैंसररोधी है. इसके साथ अंगूर के बीज का अर्क एक विशेष प्रोटीन को भी Activate करता है जिसे JNK (c-Jun N-terminal Kinase) कहते है ये प्रोटीन Apoptosis प्रक्रिया को Activate करता है.

अंगूर के बीज के अर्क बिना किसी साइड इफेक्‍ट के BLOOD कैंसर कोशिकाओं को करीब 76 प्रतिशत तक जड़ से निष्‍प्रभावी कर सकता हैं। यानि इसके संतुलित मात्रा में नियमित प्रयोग से महज 24 घंटे में कैंसर के समाप्‍त होने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

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ये अंगूर के बीजो का अर्क आपको टेबलेट, कैप्सूल या लिक्विड के रूप में फार्मेसी से मिल जायेगा नेचुरल रूप में ये सिर्फ और सिर्फ अंगूरों में पाया जाता है ,ये blood cancer के साथ साथ अन्य कैंसर के इलाज में भी काम आता है।

अगर आपको ये टेबलेट की शेप में मिले तो आप इसको 100 से 300 mg रोजाना ले सकते हैं.

Grape Seed Extract बनाने की घरेलु विधि.

500 ग्राम. अच्छी किस्म के काले अंगूर के बीज लीजिये, इसमें से 100 ग्राम बीज अलग निकाल कर रख लीजिये. 400 ग्राम बीजों के 8 अलग अलग हिस्से (अर्थात 50 ग्राम का एक हिस्सा) कर लीजिये. अभी 50 ग्राम बीजों को हल्का कूट कर 1 गिलास पानी में बिलकुल धीमी आंच पर गर्म करें, ध्यान रहे के अधिक तेज़ आंच होगी तो इसमें मौजूद Flavonoid और दुसरे महत्वपूर्ण तत्व नष्ट हो जायेंगे. जब यह आधा गिलास रह जाए तो इसको छान लीजिये और इस छाने हुए काढ़े को 100 ग्राम अलग से निकाले हुए बीजों में धीरे धीरे डालते हुए खरल कर लीजिये, (खरल जिसमे मसाला कूटते हैं), धीरे धीरे इन बीजों में ये पानी डालते जाए और अच्छे से खरल करते जाएँ. जब यह अच्छे से घुट जाए तो इसको कांच के बर्तन में रख लीजिये.

अभी जो 400 ग्राम में से बचे हुए 350 ग्राम के 7 हिस्सों में से दूसरा हिस्सा निकालिए, और इसको ऊपर बताई गयी विधि के अनुसार पहले काढ़ा बना लें, और फिर इस काढ़े को जो ऊपर खरल करने के बाद बचे हुआ बीजों के Extract में दोबारा डालकर फिर से खरल की प्रक्रिया को दोहरायें.

इसी प्रकार से ये प्रक्रिया 8 बार दोहराई जाएगी. और अंत में जो बचेगा उसको इस्तेमाल करना है.

आयुर्वेद में, एलॉपथी में, होमियोपैथी में इसका अलग अलग विधि से Extract निकाला जाता है. जो भी आपको मालूम हो वो विधि से आप निकाल सकते हैं.

Grape Seed Extract का आयुर्वेदिक स्त्रोत

आजकल बाज़ार में बहुत सारी कंपनिया आई हैं जो Grape Seed Extract के नाम से बहुत महंगे महंगे प्रोडक्ट बेचते हैं, मगर आयुर्वेद में बहुत सारी कंपनियां इसको द्राक्षास्व या अंगूरास्व के नाम से बेचती हैं. आप इसको बैद्यनाथ या ऊंझा फार्मेसी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. ये आप सुबह शाम या खाने के बाद 10 – 10 ml सेवन करें.

इस उपयोग के बारे में आप अपने डॉक्टर वैद से भी ज़रूर चर्चा करें.

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