भारत में भांग नशे और औषिधि के रूप में प्राचीनकाल से प्रयुक्त होती आ रही है । वैसे तो हिन्दुओ में एक मान्यता भी है कि भांग का पौधा “अमृत” से पैदा हुआ है तथा इसका सेवन भगवान् शिव किया करते है। इसलिए इसे ‘शिव-बूटी’ का भी नाम दे दिया गया है। अब तो अनेक शोधकर्ताओं ने भी इस पे शोध किया है और निष्कर्ष रूप में ये पाया गया है कि लम्बे अवधि तक भी इसका प्रयोग करने के उपरान्त भी इसका शरीर और मस्तिष्क पर विशेष विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है। भांग से ही गांजा और चरस बनती है लेकिन ये दोनों ही चीज जादा नुकसानदायक है । जब भांग का सेवन सही मात्रा में किया जाए, क्योंकि किसी भी चीज़ की अत्यधिकता नुकसान ही देती है। चलिए आपको बताते हैं कि आयुर्वेद किस प्रकार से भांग को एक औषधि मानता है और साथ ही आयुर्वेद इसे कई रोगों में प्रमाणिक औषिधि मानता है-

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आइये अब जानते है आयुर्वेद में इसके क्या प्रयोग है-

  • जुकाम की एक अचूक दवा है । भांग के पत्तो को पीस कर बरगद या फिर पीपल के पत्तो में लपेटकर धागे से बाँध दे। अब इस पर एक अंगुल मोटा मिटटी का लेप चढ़ा दे और इसे कंडे की आग में दबा दे जब मिटटी का रंग लाल हो जाए तो उसे ठण्डा कर ले तत्पश्चात भांग को उसमे से निकालकर चूर्ण कर ले और उसमे सेंधा नमक तथा तेल मिलाकर एक ग्राम की मात्रा सेवन करे। इस प्रयोग से कैसा भी जुकाम हो मिट जाता है।
  • भांग के पत्ते को जल के साथ चटनी की तरह पीसकर फिर साफ़ सूती कपडे में बाँध कर इसका रस निचोड़ ले। इस रस को थोडा सा आंच पर गर्म करके कान में टपका दे । इस प्रयोग से कान का दर्द मिट जाता है। साथ ही यदि कान में कीड़े पड़ गए हो तब वे भी मर जाते है ।
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  • आधा ग्राम भांग,एक ग्राम काली मिर्च,दस ग्राम बादाम गिरी और 25 ग्राम मिश्री को 250 मिलीलीटर पानी में घोटकर छानकर पीने से परिश्रम करने से आई थकावट दूर हो जाती है।
  • भांग के चूर्ण को साफ़ सूती कपडे में बाँध कर एक छोटी सी पोटली बनाए और इसमें एक धागा बांधे इस पोटली को योनी में तीन घन्टे तक रहने दे। बाद में धागे की सहायता से वापस निकाल ले। इस प्रयोग को कुछ दिन करने से ढीली योनी भी तंग हो जाती है।
  • भांग के पत्तो के स्वरस में शहद मिला कर लेने से खांसी में आराम मिलता है।
  • भांग को जल के साथ पीसे और पेस्ट बनाकर इसे अपने बालो पे एक घंटे लगा रहने दे। सिर में जितने भी जुएँ और लीखें है खत्म हो जाती है।
  • भांग और बीजबंद(बलाबीज) 100-100 ग्राम ,पोस्तदाना 50 ग्राम और काली मिर्च 25 ग्राम लेकर महीन चूर्ण बना ले। इस चूर्ण में से 3-3 ग्राम चूर्ण को मिश्री मिले गर्म दूध के साथ नित्य सेवन करने से शीघ्रपतन रोग दूर हो जाता है।
  • एरण्ड के तेल में भांग को पीसकर शिश्न पर लेप करने से उसकी ताकत में इजाफा होता है ।
  • जिस रोगी को दस्त हो रहे हो उसे भांग के चूर्ण को शहद या सौंफ के अर्क के साथ खिलाना चाहिए।
  • भांग का महीन चूर्ण कपडे में छानकर घाव में भर देने से सूजन और दर्द दूर होकर घाव जल्दी भर जाता है इसमें टिटनेस होने का खतरा भी नहीं रहता है तथा घाव में कीड़े पड़ जाने पर भी यह प्रयोग अच्छा रहता है।
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  • भांग की मात्रा 10 ग्राम ले और अलसी की मात्रा 30 ग्राम दोनों को साथ पीस कर पुल्टिस बना कर बवासीर के मस्सों पर रख कर कुछ दिन बांधे बहुत फायदा होता है। भांग को आप जल में पीस कर गुनगुना-गुनगुना पुल्टिस बवासीर पर बाँधने से दर्द भी मिट जाता है।
  • अपचन की स्थिति में हो रहे पेट दर्द से राहत के लिए भांग और काली मिर्च के चूर्ण को गुड में मिलाकर खिला दे। लाभ मिलेगा।
  • भांग,सेंधा नमक 1-1 ग्राम तथा सौंफ और जीरा 2-2 ग्राम लेकर चूर्ण बनाकर छाछ के साथ दिन में तीन बार सेवन करने से भूंख न लगना या खाया-पिया न पचना तथा दस्त लगना आदि रोग मिट जाता है।
  • एक ग्राम भांग को घी में भून ले फिर दस ग्राम शहद या गुड में मिलाकर देने से नींद अच्छी आती है। वृद्ध लोगो को रात देर से नींद न आने की शिकायत के लिए ये नुस्खा उत्तम है।
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  • खरल में भांग की पत्तियों को बकरी के दूध के साथ पीसकर पैरों के तलवे पर लेप करने से जल्दी ही नींद आने लगती है। उन्माद रोगी को सुलाने में ये प्रयोग बेहतर है।

अन्य फायदे –

सिर दर्द

यदि किसी को निरंतर सिर दर्द रहता है तो भांग की पत्तियों के रस का अर्क बनाकर कान में 2-3 बूंद डाल दें, सिरदर्द धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा और जड़ से खत्म होगा।

मानसिक रोगियों का इलाज

यह सत्य है कि भांग का सेवन करने से मानसिक संतुलन बिगड़ता है, लेकिन डॉक्टर इसे सही मात्रा में उपयोग में लाकर मानसिक रोगियों का इलाज भी करते हैं। मानसिक रोगों में चिकित्सक इसे 125 मिलीग्राम की मात्रा में आधी मात्रा हींग मिलाकर प्रयोग कराते हैं।

मांसपेशियों का दर्द, आर्थराइटिस (गठिया)

भांग में इंफ्लैमेटरी तथा एनेलजेसिक केमिकल्स होते हैं। जिसके कारण शरीर के दर्द में तुरंत आराम मिलता है। एक लिमिटेड मात्रा में भांग का प्रयोग करने से मांसपेशियों का दर्द, आर्थराइटिस (गठिया) के दर्द में तुरंत राहत मिलती है।

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तेज बुखार

बहुत तेज बुखार होने पर थोड़ी सी भांग पीने से शरीर का तापमान सामान्य होकर फीवर उतर जाता है।

चक्कर से बचाव

2013 में वर्जीनिया की कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों ने यह साबित किया कि गांजे में मिलने वाले तत्व एपिलेप्सी अटैक को टाल सकते हैं. यह शोध साइंस पत्रिका में भी छपा. रिपोर्ट के मुताबिक कैनाबिनॉएड्स कंपाउंड इंसान को शांति का अहसास देने वाले मस्तिष्क के हिस्से की कोशिकाओं को जोड़ते हैं.

ग्लूकोमा में राहत

अमेरिका के नेशनल आई इंस्टीट्यूट के मुताबिक भांग ग्लूकोमा के लक्षण खत्म करती है. इस बीमारी में आंख का तारा बड़ा हो जाता है और दृष्टि से जुड़ी तंत्रिकाओं को दबाने लगता है. इससे नजर की समस्या आती है. गांजा ऑप्टिक नर्व से दबाव हटाता है.

चिंता, अवसाद तथा डिप्रेशन

किसी भी तरह की चिंता, अवसाद तथा डिप्रेशन संबंधी बीमारियों को दूर करने के लिए भांग के सेवन रामबाण उपाय है।

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हैपेटाइटिस सी के साइड इफेक्ट से आराम

थकान, नाक बहना, मांसपेशियों में दर्द, भूख न लगना और अवसाद, ये हैपेटाइटिस सी के इलाज में सामने आने वाले साइड इफेक्ट हैं. यूरोपियन जरनल ऑफ गैस्ट्रोलॉजी एंड हेपाटोलॉजी के मुताबिक भांग की मदद से 86 फीसदी मरीज हैपेटाइटिस सी का इलाज पूरा करवा सके. माना गया कि भांग ने साइड इफेक्ट्स को कम किया.

कैंसर पर असर

2015 में आखिरकार अमेरिकी सरकार ने माना कि भांग कैंसर से लड़ने में सक्षम है. अमेरिका की सरकारी वेबसाइट cancer.org के मुताबिक कैनाबिनॉएड्स तत्व कैंसर कोशिकाओं को मारने में सक्षम हैं. यह ट्यूमर के विकास के लिए जरूरी रक्त कोशिकाओं को रोक देते हैं. कैनाबिनॉएड्स से कोलन कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और लिवर कैंसर का सफल इलाज होता है.

कीमोथैरेपी में कारगर

कई शोधों में यह साफ हो चुका है कि भांग के सही इस्तेमाल से कीमथोरैपी के साइड इफेक्ट्स जैसे, नाक बहना, उल्टी और भूख न लगना दूर होते हैं. अमेरिका में दवाओं को मंजूरी देने वाली एजेंसी एफडीए ने कई साल पहले ही कीमोथैरेपी ले रहे कैंसर के मरीजों को कैनाबिनॉएड्स वाली दवाएं देने की मंजूरी दे दी है.

प्रतिरोधी तंत्र की बीमारियों से राहत

कभी कभार हमारा प्रतिरोधी तंत्र रोगों से लड़ते हुए स्वस्थ कोशिकाओं को भी मारने लगता है. इससे अंगों में इंफेक्शन फैल जाता है. इसे ऑटोएम्यून बीमारी कहते हैं. 2014 में साउथ कैरोलाइना यूनिवर्सिटी ने यह साबित किया कि भांग में मिलने वाला टीएचसी, संक्रमण फैलाने के लिए जिम्मेदार मॉलिक्यूल का डीएनए बदल देता है. तब से ऑटोएम्यून के मरीजों को भांग की खुराक दी जाती है.

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दिमाग की रक्षा

नॉटिंघम यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों ने साबित किया है कि भांग स्ट्रोक की स्थिति में मस्तिष्क को नुकसान से बचाती है. भांग स्ट्रोक के असर को दिमाग के कुछ ही हिस्सों में सीमित कर देती है.

एमएस से बचाव

मल्टीपल स्क्लेरोसिस भी प्रतिरोधी तंत्र की गड़बड़ी से होने वाली बीमारी है. फिलहाल यह असाध्य है. इसके मरीजों में नसों को सुरक्षा देने वाली फैटी लेयर क्षतिग्रस्त हो जाती है. धीरे धीरे नसें कड़ी होने लगती हैं और बेतहाशा दर्द होने लगता है. कनाडा की मेडिकल एसोसिएशन के मुताबिक भांग एमएस के रोगियों को गश खाने से बचा सकती है.

दर्द निवारक

शुगर से पीड़ित ज्यादातर लोगों के हाथ या पैरों की तंत्रिकाएं नुकसान झेलती हैं. इससे बदन के कुछ हिस्से में जलन का अनुभव होता है. कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की रिसर्च में पता चला कि इससे नर्व डैमेज होने से उठने वाले दर्द में भांग आराम देती है. हालांकि अमेरिका के एफडीए ने शुगर के रोगियों को अभी तक भांग थेरेपी की इजाजत नहीं दी है.

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सावधानियां

  • कभी भी खाली पेट भांग का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • डायबिटीज के रोगियों, हार्ट पेशेंट्स, प्रेगनेंट लेडीज, बच्चों तथा बुजुर्गों को भांग का सेवन नहीं करना चाहिए।

भांग के नुकसान

  • भांग के अधिक प्रयोग से अनिद्रा की बीमारी और रक्तचाप में परिवर्तन आने लगता है।
  • यह मादक द्रव्य है। अधिक मात्रा में सेवन करना नशा है। अत: सावधानी से प्रयोग करना चाहिए।
  • भांग के रोजाना प्रयोग से व्यक्ति चिड़चिड़े स्वभाव का हो जाता है, और कभी कभी डिप्रेशन का शिकार बन जाता है।
  • भांग के सेवन से नपुंसकता आती है और गर्भवती महिला के लिए बहुत खतरनाक है।
  • भांग के अत्यधिक प्रयोग से दिमाग के कार्य करने की क्षमता कम हो जाती है और याददाश्त कमजोर हो जाती है।
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2 COMMENTS

  1. […] तो इजाफा करती ही है साथ ही इसमें अनेक औषधीय गुण भी होते हैं। यह गर्म और रूखी होती है। […]

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