सिडा कोर्डिफोलिया और कंट्री मैलो को ही आयुर्वेद में बाला कहा जाता है। बाला का शाब्दिक अर्थ है ताकत। मतलब यह कि बाला के जरिये हम अपने शरीर को ऊर्जा और ताकत से भर सकते हैं। असल में बाला प्राचीन आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जो हड्डियों को, मसल्स को और जोड़ों को मजबूत, ताकतवर बनाने के काम आती है। बाला का वानस्पतिक नाम ही सिडा कोर्डिफोलिया है। यह माल्वाकी परिवार से ताल्लुक रखता है। कुछ लोग बाला को सिडा रेटुसा भी कहते हैं। हिंदी में बाला को बरियारा या खिरैंती नाम से जाना जाता है। बाला के असंख्य औषधीय गुण हैं। इस लेख में इन तमाम खूबियों पर चर्चा करेंगे।

मुत्राशय में जलन

जिन लोगों को मुत्राशय में जलन हो, वे भी बाला का इस्तेमाल आसानी से कर सकते हैं। असल में आयुर्वेद में बाला को बहुत खास महत्व मिला हुआ है। वास्तव में बाला न सिर्फ सामान्य बीमारियों को ठीक करता है बल्कि आंतरिक समस्याओं में भी इसका योगदान अभिन्न है। मुत्राशय में जलन पानी कम पीने से या अन्य समस्याओं के कारण हो सकता है।

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पित्त से सुरक्षा

पित्त और वात। ये दोनों ऐसी समस्या है कब किसे हो जाए, कोई नहीं कह सकता। लेकिन बाला इन दोनों ही बीमारियों के लिए उपयोगी हल है। असल में जो भी बीमारी शारीरिक खराबी के चलते होती है, बाला उन तमाम समस्याओं से लड़ने में मदद करता है। पित्त और वात ऐसी ही दो बीमारियां है जो यकायक हो सकती हैं। आयुर्वेद के मुताबिक ऐसी स्थिति में बाला का उपयोग बेहतर रहता है।

शुक्रला

बाला शुक्रला गुण को भी बढ़ावा देता है। सवाल है शुक्रला क्या है? शुक्राला शुक्र धातु है। असल में इस धातु के कारण आयुर्वेद इसका वीर्य बढ़ाने हेतु इस्तेमाल करता है। यही नहीं वीर्य की सेहत पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। दरअसल यह बाला शुक्र को बढ़ाने और बेहतर बनाने में महति भूमिका अदा करता है। यह दोनों पर ही यानी महिला और पुरुष पर समान कारगर है। यह फर्टिलिटी को भी प्रभावित करता है। इसके अलावा जिन पुरुषों को सेक्स सम्बंधी समस्याएं हैं, उनके लिए भी बाला बहुत उपयोगी है। खासकर जो शीघ्रपतन जैसी बीमारियों के चपेट में है। यूं तो गहरे से देखें तो मौजूदा समय में तनाव का पारा इतना बढ़ा हुआ है कि शीघ्रपतन जैसी समस्या लगभग हर पुरुष में होने लगी है। ऐसे में बाला उनके लिए बहुत उपयोगी है। आयुर्वेद इसके इस्तेमाल की सलाह देता है।

प्रज्वलनरोधी

बाला में प्रज्वलनरोधी गुण भी समाहित है। इसके अलावा बाला का बाहरी इस्तेमाल कर हम तमाम किस्म के घाव को भी भर सकते हैं। यही नहीं आंखों में सूजन या जलन होने पर भी बाला का पेस्ट लगाया जा सकता है जिससे सूजन और जलन में कमी आती है। इतना ही नहीं जिन लोगों अर्थराइटिस सम्बंधी समस्या है, उनके लिए भी बाला बेहतरीन विकल्प है और जो लोग जोड़ों के दर्द से परेशान हैं, वे भी बाला की मदद से जोड़ों के दर्द से पार पा सकते हैं। असल में बाला से बनने वाले तेल को जोड़ों में लगाया जाता है साथ ही जिस अंग विशेष में जलन हो रही है, वहां भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। दोनों ही स्थितियों में बाला कारगर है।

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कार्डियक टानिक

बाला बेहतरीन कार्डियक टानिक है। मतलब यह है कि इसके सेवन से हृदय सम्बंधी बीमारियां हमसे कोसो दूर रहती हैं। यही नहीं आयुर्वेद के मुताबिक यदि इसका नियमित विशेषज्ञों के कहे अनुसार इस्तेमाल किया जाए तो हैमरेज जैसी घातक बीमारी से भी बचा जा सकता है। आयुर्वेदिक आचार्यो का कहना है कि हृदय सम्बंधी बीमारी होने पर या हैमरेज जैसी घातक बीमारी के चपेट में आए मरीजों के लिए बाला के पौधे उपयोगी है। उन्हें इसके पौधों का इस्तेमाल करना चाहिए। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि किसी विशेषज्ञ की सलाह लें।

बड़ी आंत के लिए लाभकर

सिडा कोर्डिफोलिया बड़ी आंत की गतिशीलता को नियंत्रित करता है। असल में बाला आंत पौष्टिकता और पानी को सोखता है जो कि शरीर के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। इसका मतलब यह है कि यदि आपका पेट खराब है कि बाला का इस्तेमाल अवश्य करें। इससे आपके पेट को राहत मिलेगी और शरीर को आराम।

नव्र्स के लिए उपयोगी

बाला से बने तेल से यदि आप रोजाना मसाज करते हैं तो यह आपके नव्र्स के लिए उपयोगी है। असल में यह तेल नव्र्स को एक्साइट यानी उत्तेजित करता है। मतलब यह कि जो लोग पैरेलाइज हैं या फिर इस तरह की समस्याओं से ग्रस्त हैं, उनके लिए यह तेल काफी कारगर है। इससे उनके शरीर में उत्तेजना आने की उम्मीद बढ़ जाती है। सवाल है ऐसे में तेल का इस्तेमाल किस प्रकार किया जाए? ऐसे में जरूरी है कि मरीज की अच्छे से मसाज करें। महज तेल लगाकर शरीर न छोड़ें। इसके अलावा सर्विकल स्पोंडिलोसिस, फेशियल पैरालिसिस के मरीजों पर भी यह तेल इस्तेमाल किया जा सकता है।

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