अस्थमा में क्या खाना चाहिए इन हिंदी | अस्थमा में डाइट

लगातार बढ़ते प्रदूषण, मौसम में बदलाव और शहर प्रदूषण से सांस संबंधी बीमारियों जैसे अस्थमा और फेफड़ो सम्बंधी अन्य बिमारियों के मरीजों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। अस्थमा की बीमारी में मरीज की सांस की नलियों की पेशियों में जकड़न-भरा संकोच पैदा होता है, तो मरीज को सांस लेने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

अस्थमा के लक्षण है

सांस लेने में परेशानी होना, दम घुटना, सांस लेते समय आवाज होना, सांस फूलना, छाती में कुछ जमा हुआ या भरा हुआ सा महसूस होना, बहुत खांसने पर कफ आना, परिश्रम का काम करते समय सांस फूलना आदि लक्षण दमे के होते हैं। अस्थमा या दमे के मरीज के लिए कोई विशेष परहेज नहीं होते है परंतु निश्चित रूप से कुछ आहार ऐसे जरुर होते है जिनसे अस्थमा के मरीज को एलर्जी हो सकती है | अस्थमा में आहार भी बहुत मायने रखता है तो आइये जानते है अस्थमा और फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं में लाभकारी आहार |

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आइये जानें अस्थमा के लक्षण, अस्थमा में क्या खाये क्या नहीं इन हिंदी, अस्थमा डाइट चार्ट इन हिंदी।

अस्थमा में क्या खाना चाहिए 

  • आहार में चोकर सहित आटे की रोटी, जई के आटे की रोटी, दलिया, मूंग की दाल का सेवन करें।
  • सब्जियों में पालक, परवल, शलगम, करेला, मेथी, प्याज, धनिया, पुदीना, टिंडे, चौलाई, सहिजन, अदरक, लहसुन, आलू, ब्रोकोली, टमाटर और बूशेल्स स्प्राउट, खरबूजे, तरबूज, शिमला मिर्च, गाजर, खुबानी, चेरी, हरी मिर्च, शकरकद, टमाटर, प्याज और लहसुन,अदरक, इलाइची, पुदीना, जंगली भिंडी, तुलसी आदि का सेवन करें |
  • फलों में पपीता, चीकू, संतरा, नींबू, अंगूर, कीवी, आंवला, अनार, सेब, खजूर, अंगूर, बेरी, अंजीर, शहतूत खाएं।
    मछली का तेल, ब्लैक टी, ग्रीन टी, अखरोट, कद्दू के बीज, मूंगफली, सोया, शहद और दालचीनी सरसों का तेल, नट्स (अखरोट, बादाम, सूखे अंजीर ) आदि का सेवन करें।
  • रात को खाना कम मात्रा में और सोने से 2-3 घंटे पहले खा लें। आइये अब विस्तार से जानते है की अस्थमा के रोगी को क्या खाना चाहिए, कैसे खाना चाहिए और क्यों ? साथ ही तुरंत लाभ के लिए कुछ विशेष नुस्खे |

अस्थमा में विटामिन सी ज्यादा लें– ज्यादातर अस्थमा के रोगियों में विटामिन सी की कमी पाई गई है। यदि दो दिन में ही विटामिन सी की 500 मिलीग्राम मात्रा शरीर में पहुंच जाए तो यह कसरत के बाद पैदा होने वाली सांस लेने की समस्या और सांस में घरघराहट काफी कम हो जाती है। एक गिलास ताजा संतरे के जूस में करीब 100 मिलीग्राम विटामिन सी होता है। वैसे तो विटामिन सी ज्यादातर फलों और सब्जियों में पाया जाता है, मगर खट्टे फलों, जैसे संतरा, नींबू, अंगूर, कीवी, आंवला, ब्रोकोली, टमाटर और बूशेल्स स्प्राउट में यह भरपूर मात्रा में होता है। खरबूजे और तरबूज में भी विटामिन सी अच्छी मात्रा में हैं, इसलिए खरबूजा, तरबूज भी फेफड़ों के बहुत अच्छे मित्र साबित होते हैं। एक और सब्जी है शिमला मिर्च, इसमें विटामिन सी खट्टे फलों से भी ज्यादा पाया जाता है।

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बीटा कैरोटीन करते हैं अस्थमा का भारी विरोध : बीटा कैरोटीन का सबसे बढ़िया स्रोत गाजर है। इसलिए गाजर का खूब सेवन करें। गाजर के अलावा बीटा कैरोटीन खुबानी, चेरी, हरी मिर्च, शिमला मिर्च और शकरकंद में भी पाया जाता है।

शहद और दालचीनी : एक चम्मच शहद को आधा चम्मच दालचीनी के पाउडर में मिलाएं। इसके बाद इस मिश्रण का ठीक सोने से पहले सेवन करें। ऐसा ही सुबह उठने के तुरंत बाद करें। ऐसा नियमित रूप से करने पर अस्थमा में बहुत लाभ होता है।

अस्थमा में बेहद असरदायक है अदरक : कई अध्ययनों में पाया गया है कि अदरक भी सांस के रास्ते की सूजन को कम करती है और रास्ते को संकुचित होने से रोकती है। अदरक में कुछ ऐसे पदार्थ होने के संकेत मिले हैं जो सांस की नलियों के आस-पास की मांसपेशियों को राहत देते हैं। अदरक का इस्तेमाल करते हुए अस्थमा के कुछ घरेलू नुस्खे भी प्रचलन में हैं। ये इस प्रकार हैं

1.) अदरक, अनार के रस और शहद को बराबर मात्रा में मिलाकर इस मिश्रण की एक चम्मच मात्रा दिन में दो से तीन बार लेनी चाहिए।

2.) एक चम्मच अदरक के रस को आधा कप पानी में डालें और इस मिश्रण की एक चम्मच मात्रा रात को सोते समय लें।

3.) अदरक का करीब एक इंच लंबा टुकड़ा लेकर उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटें और इन टुकड़ों को पानी में डालकर करीब पांच मिनट तक उबाल लें। इसके बाद इस मिश्रण को ठंडा कर लें और पी जाएं।

4.) एक कप पानी में एक चम्मच मेथी के दाने लें और इन्हें उबाल लें। इसी कप में एक चम्मच अदरक और एक चम्मच शहद मिलाएं। इसके बाद इस मिश्रण को सुबह और शाम पीएं।

5.) कच्ची अदरक भी खा सकते हैं। इससे भी लाभ मिलेगा।

टमाटर, तरबूज का लाइकोपेन : एक हफ्ते में लाइकोपेन (एक कैरोटिनॉयड और एंटी ऑक्सीडेंट की तरह काम करने वाला पदार्थ) की यदि 30 मिलीग्राम मात्रा शरीर में जाती रहे तो अस्थमा का हमला उतना गंभीर नहीं होता, जितना कि वह लाइकोपेन की अनुपस्थिति में होता है। लाइकोपेन के सबसे बढ़िया स्रोत टमाटर और तरबूज हैं। इन दोनों में विटामिन सी भी खूब है, जिसकी सिफारिश पहले ही की जा चुकी है। लिहाजा टमाटर और तरबूज से अस्थमा के रोगी को दोहरा लाभ होता है।

चार घंटे तक सांस का रास्ता सुगम रखती है कैफीन : कैफीन नाम के पदार्थ कई रोगों में हानिकारक पाया है, मगर अस्थमा के मामले में यह बहुत लाभकारी पाया गया है। कैफीनयुक्त कॉफी का सेवन इसे लेने के तीन-चार घंटे बाद तक सांस के रास्ते को सुगम बनाए रखता है यानी कॉफी और चाय (खास तौर से ब्लैक टी, ग्रीन टी) का सेवन अस्थमा में बहुत राहतकारी है।

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मांसपेशियों को जकड़न से बचाता है अलसी का तेल : जैसा कि हम जानते हैं कि अलसी के तेल में मैग्नीशियम काफी होता है। यह पदार्थ अस्थमा में लाभकारी हैं। मैग्नीशियम सांस के रास्ते के चारों तरफ की मांसपेशियों को राहत देता है, जिससे सांस का रास्ता अच्छी तरह से खुला रहता है। जब ये मांसपेशियां जकड़ जाती हैं या सख्त होती हैं, तभी अस्थमा का दौरा भी पड़ता है। मैग्नीशियम कीवी फल में भी होता है। मैग्नीशियम पालक और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियों में भी भरपूर होता है। इनमें फोलेट भी खूब होता है, जो एलर्जिक रिएक्शन को कम करने के लिए जाना जाता है।

ओमेगा-3 फैटी एसिड हैं बहुत लाभकारी : ओमेगा-3 फैटी एसिड भी अस्थमा में काफी लाभकारी पाए गए हैं। ये एसिड शरीर में सूजन के खिलाफ काम करते हैं, इसलिए इनका सेवन अस्थमा के रोगी को फायदा पहुंचाता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड अलसी के तेल, मछली (सालमन, टूना और मैकेरल में) और मछली के तेल, अखरोट, कद्दू के बीज, मूंगफली, सोया और सरसों के तेल में मुख्य रूप से पाए जाते हैं।

सावधानी : नट्स (अखरोट, मूंगफली, बादाम आदि) ओमेगा-2 फैट्स के अच्छे स्रोत तो होते हैं, मगर यदि किसी व्यक्ति को फूड एलर्जिक वाला अस्थमा है तो नट्स का इस्तेमाल फायदे की बजाय नुकसान कर सकता है। इसलिए नट्स का इस्तेमाल सावधानीपूर्वक और डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए।

अस्थमा रोगी के बढ़िया मित्र हैं प्याज और लहसुन : प्याज में उस फ्लेवोनॉयड के छोटे-छोटे क्रिस्टल यह पदार्थ अस्थमा में पैदा होने वाली सूजन के खिलाफ काम करता है। यह प्रदूषण से फेफड़ों और श्वसन नली की लाइनिंग की भी रक्षा करता है। उधर सूजन को कम करना लहसुन का गुण है। विशेषज्ञों की सलाह है कि लहसुन की 10 से 15 तक कलियां लेकर इन्हें एक कप दूध में डालकर उबाल लें। इस मिश्रण को दिन में एक बार पीएं। इसके अलावा लहसुन की चाय भी बनाई जा सकती है। इसके लिए तीन-चार कलियां लेकर गर्म पानी में डालें और करीब पांच मिनट तक उबालें। इसके बाद इसे ठंडा हो जाने दें और फिर सेवन करें।

शहद भी है शानदार औषधि : अस्थमा में हमारे फेफड़ों के हवा के रास्ते संकरे होने के अलावा फूल और सूज जाते हैं, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है। अनेक परीक्षणों में पाया गया है कि शहद सांस लेने के रास्तों की म्यूकस झिल्ली को आराम पहुंचाता है। सांस की नलियों में म्यूकस का जमा होना, जिससे सांस का रास्ता संकुचित हो जाता है, अस्थमा का बड़ा संकेत है। शहद इसी म्यूकस को जमा होने से रोकता है। खास तौर से यह रात के समय काफी फायदा पहुंचाता है। शहद का इस्तेमाल करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि अस्थमा के मामले में गहरे रंग का गाढ़ा शहद ज्यादा लाभदायक होता है। हल्के शहद में एंटी ऑक्सीडेंट कम होते हैं। जहां तक इस्तेमाल की बात है तो एक बार में एक चम्मच का चौथाई हिस्सा लेना चाहिए। शहद को अकेले ही इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा चाय में भी चम्मच का चौथाई हिस्सा शहद डालकर लिया जा सकता है। शहद को दो साल और इससे ऊपर की उम्र के बच्चे और व्यक्तियों को भी दिया जा सकता है लेकिन इस बात का ख्याल रखें की शहद में पराग के अंश भी हो सकते हैं। पराग कण अनेक लोगों में एलर्जी का कारण होते हैं, इसलिए शहद का इस्तेमाल करते वक्त इस बाद का भी ध्यान रखना चाहिए।

सांस का रास्ता संकरा होने से रोकती है तुलसी : तुलसी सांस के रास्तों को संकरा होने से रोकती है और अस्थमा की समस्या में राहत प्रदान करती है।

अंजीर का सेवन देगा अच्छा नतीजा : अस्थमा की समस्या में अंजीर का सेवन भी अच्छा नतीजा देता है। इसके लिए करीब तीन सूखे अंजीर को साफ करके एक को पानी में रात भर के लिए भिगोया जाता है। इसके बाद सुबह खाली पेट अंजीर को खा लेते हैं और पानी को पी जाते हैं। कुछ महीनों तक नियमित ऐसा करने से अस्थमा में बहुत फायदा मिलता है। अंजीर में कफ को साफ करने और सांस लेने में आ रही कठिनाई को दूर करने की क्षमता होती है।

कफ को बाहर निकालने की क्षमता है इलायची में : सांस से जुड़ी बीमारियों में लाभ देने वाले पदार्थों में इलायची भी शामिल है। अस्थमा समेत सांस की किसी भी समस्या में इसका इस्तेमाल करना चाहिए। इसका इस्तेमाल चाय, दूध किसी के भी साथ किया जा सकता है।

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सांस से जुड़े हर अंग की सफाई में सहायक है पुदीना : पुदाने की गंध नाक, गले, सांस के रास्ते और फेफड़ों में कफ के जमाव को साफ करती है। अस्थमा और जुकाम में पुदीना राहत देने का काम करता है। इसीलिए ज्यादातर बामों में पुदीने का इस्तेमाल किया जाता है। कुल मिलाकर अस्थमा के रोगी को पुदीने का सेवन नियमित करना चाहिए।

सेब और अंगूर-बेरी – अस्थमा के मरीज के लिए सेब का नियमित सेवन जरूरी है। सेब में मौजूद फ्लेवोनॉयड तत्व अस्थमा में काफी राहत देता है। यह पदार्थ हवा (सांस) के रास्तों को खोलने में मदद करता है। सेब की तरह अंगूर में भी फ्लेवोनॉयड भरपूर होते हैं, इसलिए अंगूर भी अस्थमा में लाभकारी है। यह पदार्थ बेरी में भी होता है, इसलिए बेरी का सेवन भी सही रहेगा।

एंटी ऑक्सीडेंट और अस्थमा : अस्थमा के रोगी में फ्री रेडिकल्स का निर्माण बहुत तेजी से होता है। फ्री रेडिकल्स शरीर के सबसे बड़े शत्रु हैं, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। अस्थमा के मामले में ये फ्री रेडिकल्स म्यूकस (बलगम) का निर्माण करके फेफड़ों और सांस के रास्ते को संकरा बना देते हैं। अस्थमा के रोगी के शरीर में एंटी ऑक्सीडेंट की काफी कमी पाई जाती है, इसलिए यदि अस्थमा का रोगी एंटी ऑक्सीडेंट के धनी पदार्थ लेता है तो उसे फायदा होता है।

अस्थमा में क्या नहीं खाना चाहिए : दमा परहेज

  • भारी, गरिष्ठ, तले हुए, मिर्च-मसालेदार भोजन अधिक मात्रा में न खाएं। इनका परहेज रखें |
  • बासी भोजन, चावल, दही, अंडा, दूध, छाछ, अमचूर, इमली न खाएं।
  • शराब, मांस, चिकन, गुड़, चना, मिठाई से परहेज करें।
  • ठंडे, शीतल पेय, बर्फ, आइसक्रीम न खाएं इनका परहेज रखें ।
  • दूध से बनी चीजों का सेवन न करें।
  • अंडा बढ़ा सकता है अस्थमा रोगी की समस्या अनेक लोगों में अंडे और उससे बने उत्पादों के कारण त्वचा की एलर्जी हो जाती है। इस एलर्जी का एक कारण अस्थमा के रूप में भी सामने आ सकता है। इसलिए दमे में अंडे का परहेज रखें |
  • मूंगफली भी पहुंचा सकती है नुकसान ज्यादातर अस्थमा के रोगियों को मूंगफली से एलर्जी होती है यानी मूंगफली उनके अस्थमा अटैक को तेज करने का काम कर सकती है, इसलिए अस्थमा के रोगी को मूंगफली से दूर ही रहना चाहिए। मूंगफली के अलावा बाकी नट्स भी नुकसानदायक हो सकते हैं। यह व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर करता है।
    अस्थमा में ज्यादा नमक ठीक नहीं अस्थमा में ज्यादा नमक का सेवन भी सही नहीं है।
  • सेलफिश भी करती है एलजीं अस्थमा के लिए लाभकारी पदार्थों की सूची में मछली का नाम भी आया है, मगर अनेक बच्चों में सेलफिश से एलर्जी बहुतायत में पाई जाती है, इसलिए अस्थमा के मामले में इसका सेवन भी नहीं करना चाहिए।
  • अस्थमा के किसी भी रोग में धूम्रपान नुकसानदायक है, इसलिए अस्थमा के रोगी को धूम्रपान से बचना चाहिए।
    जंक फूड और डिब्बाबंद भोज्य पदार्थों से भी बचना चाहिए। कोल्ड ड्रिक्स, फ्राई किए पदार्थ, ज्यादा वसा और चिकनाई वाले पदार्थ भी लाभकारी नहीं हैं।
  • स्किन एलर्जी करने वाले पदार्थ पहचानें = ज्यादातर हमारी त्वचा को गेहूं और कुछ अन्य अनाजों में पाए जाने वाले ग्लूटिन तत्व, दूध से बने उत्पादों, अंडा, विभिन्न पदार्थों में इस्तेमाल किए जाने वाले रंग व प्रिजर्वेटिव, सोया, नट्स, सी फूड और शराब से एलर्जी होती है। आप यह देखें कि इन पदार्थों में से आपको किस चीज से एलर्जी है। फिर उसी पदार्थ और उससे बने चीजो को अपने से दूर कर दें।
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अस्थमा के रोगी ये उपाय भी आजमायें

राहत देती है सरसों के तेल की मालिश : अस्थमा के अटैक के दौरान सरसों के तेल की मालिश सांस के रास्ते को साफ करने में मदद करती है। इसके लिए थोड़ा-सा सरसों का तेल लें और उसमें थोड़ा-सा कपूर डालकर गर्म करें। इस मिश्रण से छाती और पीठ के ऊपरी हिस्से पर मालिश करें। ऐसा दिन में कई बार करें।

एक लहसुन की कली पीसकर एक चम्मच सरसों के तेल में मिला लें और चुटकी भर सेंधा नमक डाल कर हलका गर्म करके सीने और पीठ पर मालिश कर दें। ऊपर से गर्म कपड़ा लपेट दें।

सांस के रास्ते की बाधा हटाता है यूकेलिप्टस का तेल : शुद्ध यूकेलिप्टस के तेल में कफ को साफ करने की विशेषताएं पाई हैं। इस तेल के इस्तेमाल के लिए इसकी कुछ बूंदें पेपर टॉवल (किचन पेपर या किचन रोल) पर डाल लें। इसके बाद इस कागज को सोते समय इस तरह से सिर पर रख लें कि इसकी सुगंध आपकी सांसों में जाती रहे। दूसरा तरीका यह है कि खूब गर्म पानी में इस तेल की तीन-चार बूदें डालें और फिर इस पानी की भाप लें।

धूप का सेवन : धूप के रूप में अल्ट्रावायलेट किरणों की खुराक अस्थमा की समस्या को कम कर सकती है। धूप का सेवन सुबह और शाम के वक्त ही करना चाहिए।

अस्थमा में इन बातों का भी रखें ख्याल

  • अपनी कार्यक्षमता से अधिक परिश्रम का कार्य न करें।
  • भोजन करके तुरंत न सोएं।
  • एस्प्रिन का सेवन न करें।
  • धूम्रपान करने की आदत जारी न रखें।
  • बरसात में भीगने से बचें। और अस्थमाके मरीजों को सर्दियों में सावधानीपूर्वक रहना चाहिए |
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