अल्जाइमर रोग में क्या खाना चाहिए इन हिंदी : आजकल के तनाव ग्रस्त जीवन और प्रदूषण के कारण याद रखने की कमजोर क्षमता, भूलने की समस्या Amnesia और अल्जाइमर रोग जैसे रोगों को काफी व्यापक बना दिया है | इन सब बिमारियों के नाम भले ही अलग-अलग हो पर परिणाम सबका एक ही होता है याददाश्त में तथा स्मृति लोप | औसतन अधिकांश लोगों की स्मरण शक्ति यानि याद रखने की क्षमता लगभग एक जैसी होती है, लेकिन कुछ मेधावी व्यक्तियों की याद रखने की शक्ति आश्चर्यजनक भी होती है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि स्मरण शक्ति एक अर्जित गुण है, जिसका कम या तेज होना या बढ़ा लेना बहुत कुछ हमारे ऊपर निर्भर करता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि स्मरण शक्ति का हमारी रुचि के साथ गहरा संबंध है। आइये जाने diet tips and foods to eat in alzheimer in hindi.

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अल्जाइमर रोग के कारण : स्मरण शक्ति की कमी होने के प्रमुख कारणों में रुचि का अभाव, कार्यों को समायोजित ढंग से क्रमानुसार न करना, कार्य की अधिकता, कार्य के प्रति ऊब और उपेक्षा का भाव रखना, किसी बात को याद रखने की पूर्ण इच्छा का न होना, विषय को पूरे मनोयोगपूर्वक समझने का प्रयत्न न करना, बराबर चिंतित रहना, नशीले पदार्थों का सेवन, शारीरिक या मानसिक बीमारी, वृद्धावस्था, मस्तिष्क की जन्मजात विकृति, सिर में चोट लगना, पोषण की कमी से एनीमिया, शारीरिक क्षमता से अधिक कार्य करना, क्रोध, भय, चिंता, अनिद्रा, अधिक रक्तस्राव, रजोनिवृत्ति आदि होते हैं। अल्‍जाइमर रोग आमतौर पर धीरे-धीरे शुरू होता है | इसके शुरुआती लक्षण बार-बार भूलना, बातचीत करने समय सही शब्द याद न आना, लोगों और साधारण वस्तुओं को न पहचान पाना आदि होते हैं। अन्य कारणों में मधुमेह, डिप्रेशन, नींद की कमी और सिर में चोट लगना हो सकती है।

लक्षण : इस रोग के लक्षणों में पढ़ी, देखी, सुनी बातों का याद न रहना, किसी जगह वस्तु रखकर भूल जाना, पढ़कर याद करने की इच्छा न होना, अरुचि, आलस्य, चिड़चिड़ापन, कमजोरी, निराशा का भाव, घबराहट आदि देखने को मिलते हैं। अल्‍जाइमर रोग में स्थिति और भी गंभीर हो जाती यहाँ तक की रोगी अपने शरीर पर काबू रखना और रोजमर्रा के काम करने में भी असफल महसूस करता है | Alzheimer’s Disease Nutrition and Proper Diet.

अल्‍जाइमर रोग में क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए

  • हलका, संतुलित, पौष्टिक आहार नियमित समय पर खाएं।
  • फूल गोभी, सौंफ, गुड़, आगरे का पेठा, तिल, पालक खाएं।
  • फलों में जामुन, स्ट्राबेरीज, नारियल, लीची, आम, सेब, संतरा, टमाटर और गाजर खाएं।
  • रात में भिगोई 6 बादाम सुबह निकालकर मिस्री के साथ पीस लें और बराबर की मात्रा में मक्खन के साथ रोजाना सुबह खाएं। ऊपर से एक कप दूध पिएं।
  • सुबह-शाम के भोजन में आंवले का मुरब्बा खाएं।
  • भोजन के बाद गुड़ और तिल्ली से बना एक लड्डू या गजक का टुकड़ा चबा-चबा कर खाएं।
  • मक्खन, मिश्री और 5 काली मिर्च मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें।
  • गुलकन्द, अखरोट, पिस्ता, गेहूं के पौधे का रस भी पिएं।
  • अल्जाइमर रोग में तंदुरुस्त दिमाग के लिए ये फल जरूर खाएं
  • वैसे तो आप मौसम के अनुसार सभी फल खा सकते हैं, मगर यहां दिए गए फल अल्जाइमर रोग में ज्यादा असर करते हैं
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एवोकैडो : इस फल में एक ऐसा फैटी एसिड होता है, जिसे ओलेइक एसिड कहा जाता है। ओलेइक एसिड को मस्तिष्क में मौजूद सफेद पदार्थ ‘माइलिन की बेहतरी के लिए जाना जाता है। माइलिन मस्तिष्क में मौजूद न्यूरॉन्स की सूचनाओं के आदान-प्रदान की गति को तेज करता है। माइलिन के अभाव में यह गति धीमी पड़ जाती है। माइलिन में एक तिहाई हिस्सा ओलेइक एसिड का होता है।

बेरी : बेरियों में फाइटोकेमिकल्स का भंडार होता है। फाइटोकेमिकल्स वे तत्व हैं, जो हमारी विभिन्न कोशिकाओं के क्षय यानी नुकसान को रोकते हैं। बेरी में एक खास पदार्थ एंथोसाइएनिडिंस होता है, जो मस्तिष्क को दुरुस्त रखता है और याद्दाश्त को बरकरार रखता है। यह बुढ़ापे के दुश्मन अल्जाइमर रोग को पास नहीं फटकने देता। इनमें एक और तत्व फ्लेवोनॉयड होता है, जो दिमाग से जुड़े पार्किसन रोग का खतरा कम करता है।

अंगूर : अंगूर में अनेक पोषक तत्वों के अलावा विटामिन बी-6 होता है, जिससे यह दिमाग के लिए बहुत काम का फल है। अंगूर में फ्लेवोनॉयड नामक तत्व है, जो एक एंटी ऑक्सीडेंट है। यह फ्री रेडिकल्स से रक्षा करता है और अल्जाइमर रोग का खतरा कम करता है।

सेब : एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर सेब दिमाग के लिए बहुत बढ़िया फल है। यह अल्जाइमर रोग और पार्किसन जैसे रोगों को दूर रखने में मददगार है।

केला : केले में एक कमाल की चीज होती है ट्रिप्टोफान। यह न केवल मूड ठीक करता है, बल्कि डिप्रेशन को दूर करता है। इसमें मौजूद विटामिन बी-6 दिमागी तंदरूस्ती देता है यानी याद्दाश्त बढ़ाने के लिए उत्तम है अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगो के लिए लाभदायक है।

चेरी : चेरी कुदरत के सबसे ताकतवर एंटी इन्फ्लेमेटरी (सूजन, शोथ के खिलाफ काम करने वाले ) सिपाही हैं। ये अल्जाइमर रोग को दूर करने का भी काम करती हैं।

दिमाग के लिए कमाल की चीज है नारियल का तेल दुनिया भर में नाम कमाने वाले न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. डेविल पर्लमूटर ने तीन पदार्थों को ‘एंटी अल्जाइमर्स ट्रायो’ का नाम दिया है। इनमें से एक है घास खाने वाले पशु का मांस, दूसरा है नारियल का तेल और तीसरा है एवोकैडो नाम का फल। एवोकैडो के बारे में हम फलों के विषय में पढ़ चुके हैं। घास खाने वाले पशु का मांस मांसाहारियों के लिए उपयोगी रहेगा, मगर नारियल का तेल सभी को लाभ देगा। ये तीनों चीजें फैट की धनी हैं, इसलिए हमें इनका सेवन नियंत्रित मात्रा में करना चाहिए। नारियल के तेल में प्रचुर मात्रा में बीटा-एचबीए नाम का तत्व होता है, जो हमारे मस्तिष्क के सुपर फ़ूड में से एक है अल्जाइमर रोग में यह भी लाभ करेगा।

वैसे तो आप सभी प्रकार की सब्जियां खा सकते हैं, मगर मस्तिष्क की मजबूती के मामले में निम्नलिखित सब्जियों को खास तौर से लें |

पालक और हरी पत्तेदार सब्जियां : अल्जाइमर रोग में हरी सब्जियां ज्यादा खाएं। इनमें पालक और अन्य हरे पत्ते वाली सब्जियां विशेष रूप से लें। पालक में विटामिन ‘के’ होने से यह दिमाग और नाड़ी-तंत्र के लिए बहुत काम का पदार्थ है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है। इसमें मौजूद विटामिन सी, ई, बीटा कैरोटीन, सेलेनियम, जिंक, मैगनीज आदि इसके एंटी ऑक्सीडेंट गुणों को और बढ़ा देते हैं। पालक में विटामिन बी के अलावा फोलेट भी होता है, जो मस्तिष्क को दुरुस्त रखने में अहम भूमिका निभाता है। यह न्यूरोट्रॉन्समीटर्स के निर्माण में मदद करता है, जो हमारे सोचने और याद्दाश्त के लिए जिम्मेदार होते हैं। फोलेट न्यूरॉन्स के डीएनए को क्षति से भी बचाता है।

टमाटर : इसमें भरपूर विटामिन सी के अलावा विटामिन ए, नियासिन, फोलेट, विटामिन बी-6, सोडियम, कार्बोहाइड्रेट्स, आयरन, कैलिशयम, प्रोटीन और फाइबर होते हैं। विटामिन बी होने से यह अल्जाइमर रोग का खतरा कम करता है। विटामिन सी और ए होने से यह कोशिकाओं के दुश्मन फ्री रेडिकल्स से लड़ता है।

ब्रोकोली-फूलगोभी : इन सब्जियों में सल्फोराफेन नाम का रसायन होता है, जो मस्तिष्क के ब्लड-ब्रेन बैरियर को मजबूत बनाता है।

अल्जाइमर रोग में हरी मटर भी है फायदेमंद : मटर में मैगनीज, आयरन, प्रोटीन और फाइबर भरपूर होते हैं। मटर में मौजूद पोषक तत्व मस्तिष्क के रसायनों के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। हरी मटर में पेंटोथेनिक एसिड भी होता है, जो ऐसे न्यूरोट्रांसमीटर के निर्माण में मदद करता है, जिससे सोते समय मस्तिष्क की कार्यप्रणाली नियंत्रित होती है।
शकरकंद : शकरकंद में भी विटामिन बी-6 होता है। यह आलू में भी होता है, मगर शकरकंद में आलू के मुकाबले ज्यादा फाइबर होते हैं। शकरकंद में भरपूर पोटेशियम होने से यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट की कमी को दूर करके दिमाग व नर्वस सिस्टम को भी दुरुस्त रखने में मदद करता है। जो अल्जाइमर रोग में बहुत जरुरी है |

चुकंदर : चुकंदर शरीर में नाइट्रेट्स को बढ़ावा देता है। नाइट्रेट्स मस्तिष्क को जाने वाले रक्त के बहाव में सुधार करते हैं, जिससे मस्तिष्क को भरपूर ऑक्सीजन मिलती है।

नियंत्रित मात्रा में अच्छे वाला फैट जरूर खाएं दिमाग की तंदरुस्ती के लिए ओमेगा-3 फैट्स बहुत जरूरी होते हैं। ये मस्तिष्क में मौजूद न्यूरॉन्स के मददगार होते हैं। लिहाजा अल्जाइमर रोग में नियंत्रित मात्रा में ऐसा भोजन जरूर करें, जिसमें ओमेगा-3 फैट्स ज्यादा हों।

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ओमेगा-3 फैट्स के धनी पदार्थ ये है -अलसी और इसका तेल, जैतून का तेल, अखरोट-बादाम-मूंगफली, सोया, तिल, सरसों का तेल

कद्दू का बीज अच्छे फैट में वह ओलेइक एसिड पाया जाता है, जिसका जिक्र एवोकैडो फल के विषय में किया गया है।
मछली खा सकें तो अच्छा है नहीं तो उसका तेल तो जरूर खाएं -मछली और इसका तेल अनेक रोगों में दवाई जैसा काम करता है। मछली में पाया जाने वाला एक विशेष प्रकार का फैटी एसिड दिमाग की कोशिकाओं को नष्ट होने से बचाता है। इस लिहाज से यह अल्जाइमर रोग में बहुत कारगर है और इससे याद्दाश्त भी बढ़ती है।

विटामिन बी अल्जाइमर रोग और मस्तिष्क संबंधी समस्याओं में विशेष रूप से फायदा पहुंचाता है। विटामिन बी-6 मस्तिष्क के विभिन्न न्यूरोट्रांसमीटर्स, जैसे नोरपाइनफ्राइन, डोपामाइन, सेरोटोनिन आदि के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो याद्दाश्त और विभिन्न भावनाओ के लिए जिम्मेदार होते हैं।

विटामिन बी-6 उन ज्यादातर पदार्थों में होता है, जिनका जिक्र हम ऊपर कर चुके हैं। इनके अलावा यह विटामिन निम्नलिखित पदाथों में भी पाया जाता है- दूध 2. मास 3. अंडा। इसमें इस विटामिन के अलावा डीएचए नाम का ओमेगा-3 फैटी एसिड भी होता है, जो न्यूरॉन्स के बीच संपर्क को बेहतर बनाता है।

दालें, विशेषकर मूंग और मसूर। विटामिन बी के अलावा इनका आयरन याद्दाश्त को बढ़ाने में मदद करता है।

ब्राउन राइस और अन्य साबुत अनाज : ब्राउन राइस में विटामिन बी (राइबोफ्लेविन) होता है, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं को ऊर्जा देता है। इसमें विटामिन बी के अन्य प्रकार, जैसे नियासिन, थियामिन और इनोसिटोल भी होते हैं, जो मस्तिष्क की तंदरुस्ती के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। इसीलिए सफेद चावल के स्थान पर ब्राउन राइस का इस्तेमाल करें। इसके अलावा अनाज में जितना अधिक हो सके, साबुत अनाज (आटे और दलिया के रूप में) का इस्तेमाल करें।
अल्जाइमर रोग में ब्राहमी का सेवन भी जरूर करें

ब्राहमी के सेवन को मस्तिष्क के लिए बढ़िया माना जाता है। ब्राहमी को वेलाराई के नाम से भी जाना जाता है। इसका अंग्रेजी नाम कैंटीला एशियाटिका है। अल्जाइमर रोग में इसकी पत्तियां विशेष रूप से गुणकारी होती हैं। इन्हें सलाद, जूस आदि में इस्तेमाल किया जा सकता है।

गेहूं का अंकुर (व्हीट जर्म) यह एक तरह से पोषक तत्वों की खान है। इसमें वसा नाममात्र की है और कोलेस्ट्रॉल होता ही नहीं है। यह दिमाग को दुरुस्त रखता है।

ग्रीन टी में मौजूद पॉलीफिनोल नाम का एंटी ऑक्सीडेंट बढ़ती उम्र पर लगाम लगाता है। ग्रीन टी याद्दाश्त बढ़ाने में भी कारगर पाई गई है। यह दिमाग के लिए बढ़िया है तो अल्जाइमर रोग और पाकिसन रोग की दुश्मन है।
विटामिन डी भी जरूर चाहिए

हमारा मस्तिष्क विटामिन डी भी मांगता है। इसलिए सुबह के वक्त आधा-एक घंटा धूप का सेवन जरूर करें। यह विटामिन धूप, दूध, दही, हरी सब्जियों, मछली के तेल, अंडे में मिलता है। धूप के अलावा बाकी सभी पदार्थों का जिक्र ऊपर किया हो गया है। बची धूप, इसलिए मस्तिष्क की सेहत के लिए धूप भी जरूर लें।

अल्जाइमर रोग में क्या नहीं खाना चाहिए

  • भारी, गरिष्ठ, तली, तेज मिर्च-मसालेदार, कडक चाय, कॉफी से परहेज करें।
  • अल्जाइमर रोग में नशीले पदार्थ, तंबाकू, शराब, गुटखा आदि का सेवन न करें।
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दिमाग के लिए हानिकारक पदार्थ

जब ज्यादा चुस्ती चाहें तो कार्बोहाइड्रेट कम खाएं यहां हम दिमाग के लिए नुकसान की बात नहीं कर रहे, लेकिन जब आप दिमाग को ज्यादा चुस्त रखना चाहते हैं या अल्जाइमर रोग से पीड़ित है तो कार्बोहाइड्रेट के धनी पदार्थ कम खाएं।
मस्तिष्क को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से खाए जा रहे फल यदि ताजा नहीं हैं यानी बेमौसम के हैं तो उनके एंटी ऑक्सीडेंट गुण नष्ट हो जाते हैं, इसलिए उन्हें खाने का कोई फायदा नहीं होता है।

मस्तिष्क को व्याकुल बनाता है ज्यादा सोडा– एक अध्ययन में पाया गया है कि जो लोग दो से तीन केन सोडा (सॉफ्ट ड्रिक, कोल्ड ड्रिक, कोक आदि) रोजाना पी जाते हैं, वे कम सोडा पीने वालों के मुकाबले ज्यादा हताशा और व्याकुलता महसूस करते हैं। मस्तिष्क को भ्रमित करता है ज्यादा मीठा ज्यादा मीठे पदार्थ तुरंत ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा देते हैं। लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर ये शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव पैदा कर देते हैं, जिससे मस्तिष्क में भ्रम की स्थिति पैदा होती है और वह एक जगह केंद्रित नहीं हो पाता। कृत्रिम मीठा और कृत्रिम रंग तो और भी ज्यादा नुकसान करते हैं। इसलिए अल्जाइमर रोग में इनका सेवन ना करें |

शराब का सेवन शरीर के नर्वस सिस्टम पर सीधा असर डालता है, जिससे दिमाग की तीक्ष्णता चली जाती है और वह शिथिल हो जाता है। शराब मस्तिष्क की कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचाती है। मस्तिष्क तक ऑक्सीजन पहुंचने में बाधा डालता है निकोटिन सिगरेट और धूम्रपान के अन्य पदार्थों में मौजूद निकोटिन रक्त नलिकाओं को संकुचित कर देता है, जिससे मस्तिष्क तक खून के बहाव में बाधा आती है। कम ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व मिलने से मस्तिष्क शिथिल पड़ जाता है।

अल्जाइमर रोग में इन बातो का भी रखे ख्याल

  • रोजाना सुबह-शाम खुली हवा में घूमने जाएं।
  • रुचिकर व्यायाम नियमित रूप से करें।
  • याद रखनेवाली बातों को गहन रुचि लेकर, एकाग्रता और पूरे मन से याद करें।
  • भरपूर नींद लें।
  • मन और मस्तिष्क को खुश रखने के लिए बीच-बीच में मनोरंजन भी करते रहें।
  • एक बार में एक साथ बहुत-सी बातें याद न करें।
  • चिंता, क्रोध, भय, मानसिक तनाव के संवेगों को हावी न होने दें।
  • अपनी स्मरण शक्ति के विषय में हमेशा परेशान न रहें।
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दोस्तों अल्जाइमर रोग में क्या खाना चाहिए और क्या न खाए, Alzheimer me kya khana chahiye aur kya nhi khaye in hindi का ये लेख कैसा लगा हमें बताये और अगर आपके पास अल्जाइमर रोग कंट्रोल कैसे करे उपाय व अल्जाइमर रोग में क्या नहीं खाना चाहिए से जुड़े सुझाव है तो हमें लिखे।

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