कटिस्नायुशूल या Sciatica की समस्या होने पर मरीज को कमर के निचले हिस्से और पैरों में दर्द महसूस होता है विशेषकर उठते और बैठते समय। आमतौर पर इसे कोई बीमारी या समस्या न मानकर किसी बीमारी के लक्षणों के तौर पर देखा जाता है। इसके सबसे आम कारण हैं हर्नियेटेड डिस्क(herniated disc), रीढ़ की हड्डी में संकुचन (spinal stenosis) और अपकर्षक कुंडल रोग (degenerative disc disease) और 90 प्रतिशत मामलों में हर्नियेटेड डिस्क ही इस समस्या का कारण बनती हैं।

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मरीज़ अक्सर इस स्थिति में शिकायत करते हैं कि उन्हें तेज़ झनझनाहट या सनसनी महसूस होती है। जिसकी वजह से उन्हें प्रभावित(तकलीफ वाले) हाथ, पैर और अंगूठों से भी काम करने में तकलीफ होती है। कमर के नीचले भाग में स्थित नितम्ब तंत्रिका में अचानक तेज़ दर्द शुरू हो जाता है और कभी-कभी यह इतना गंभीर होता है कि मरीज़ के लिए बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है।

अगर आपको भी ऐसी ही शिकायत है, तो इसके इलाज के लिए एक्यूपंक्चर का एक प्राकृतिक तरीका अपनाया जा सकता है। यह एक 3000 साल पुरानी चीनी चिकित्सा पद्धति है और विभिन्न स्टडीज में इसे दर्द से आराम दिलानेवाली पाया गया है।

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जर्नल ऑफ कॉम्प्लिमेंट्री एंड ऑल्टर्नटिव मेडिसिन में 2015 में एक रिसर्च रिपोर्ट छापी गई जो 1842 लोगों पर किए गए 12 नैदानिक अध्ययन पर आधारित थी। जिसमें यह निष्कर्ष निकाला गया कि एक्यूपंक्चर कटिस्नायुशूल से पीड़ित मरीजों में दर्द की तीव्रता को कम करने में पारंपरिक पश्चिमी चिकित्सा की तुलना में अधिक प्रभावी थी।

शोधकर्ताओं के सर्वेक्षण के अनुसार साइटिका के दर्द से राहत पाने के लिए एक्यूपंक्चर करने के कोई साइड इफेक्ट नहीं होते हैं। पारम्परिक प्रक्रियाओं में उपचार के लिए पेन किलर्स, एपीड्यूरल स्टेरॉयड इंजेक्शन(epidural steroid injections), ट्रैक्शन थेरेपी, हॉट पैक, और सर्जरी का इस्तेमाल किया जाता है।
जबकि वार्मिग एक्यूपंक्चर में (गर्म सुइयों से इलाज) मरीज़ों ने शुरुआती सेशन्स के बाद आराम मिलने की बात भी कही गई है।

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